गोवा कांग्रेस ने अल्पसंख्यक कमेटी के अध्यक्ष और प्रवक्ता उरफान मुल्ला को पार्टी ने अब बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल, उन्होने पार्टी पर अल्पसंख्यकों के साथ दोहरे बर्ताव का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान नहीं देती है।

उरफान मुल्ला दो दिन पहले इस्तीफा देते हुए सोनिया गांधी को पत्र कहा था कि, कांग्रेस नेतृत्व की कमी से ग्रस्त है। गोवा में पार्टी के पुराने नेता निर्णय लेने में बुरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि, अल्पसंख्यकों के लिए कांग्रेस कुछ नहीं कर रही है।

उरफान ने कहा, ‘मैंने पार्टी के लिए 25 साल तक काम किया है। हमारी पार्टी के लोग अल्पसंख्यक समुदाय को पीछे धकेलते हैं क्योंकि वो चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का कोई नेता मुख्यमंत्री न बन जाए। पार्टी अल्पसंख्यकों को इस्तेमाल करती है। पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। नेतृत्व से मैं खुश नहीं हूं। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। मैंने पार्टी के किए सेवा भाव से काम किया।

उरफान मुल्ला को सस्पेंड करते हुए पार्टी की तरफ से कहा गया है कि 15 नवंबर को आपके द्वारा प्रेस में दिया गया बयान अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। आपने कांग्रेस पार्टी तथा नेतृत्व की कार्यक्षमता पर सवाल उठाया है। आपने पार्टी के खिलाफ यह काम किया है। गलत बयान की वजह से पार्टी की छवि खराब हुई है।

इस सब को देखते हुए पार्टी के गोवा चीफ गिरीश चंद्रोकर ने आपके निष्कासन की अनुमित दी है।आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से 6 साल के लिए निलंबित किया जाता है।

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