सियासी तौर पर सेकुलर पार्टियां मुसलमानों को चुनावों में पहले ही किनारे कर चुकी है। लेकिन अब उन पर हो रहे अत्याचार को लेकर भी पार्टियों ने आवाज उठाना बंद कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई भड़क उठे।

उन्होने महाराष्ट्र कांग्रेस की नई कमेटियों में मुसलमानों को कम प्रतिनिधित्व मिलने पर सवाल खड़े किए हैं। हुसैन दलवई ने मुलसमानों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाने के साथ ही राहुल ग़ांधी को चिठ्ठी लिखी है और हालात ठीक करने की मांग की है।

हुसैन दलवई का कहना है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने 8 कमेटियां बनाई, जिसमें कुल 210 लोगों को शामिल किया गया है, लेकिन इनमें सिर्फ 14 मुस्लिम हैं। जबकि महाराष्ट्र में मुसलमान हमेशा कांग्रेस के साथ खड़ा रहा, लेकिन कांग्रेस उन्हें नज़र अंदाज़ कर रही है।

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पार्टी के शीर्ष नेता के.सी वेणुगोपाल से मिलने पहुंचे कांग्रेसी राज्यसभा सदस्य ने कहा, “जब भी अन्य पार्टियों से चर्चा की बात आती है, तब हमें नजरअंदाज कर दिया जाता है और मुस्लिम बहुल इलाकों (सीटों) से औरों को मौका मिलता है। मैं इसी मुद्दे पर केसी वेणुगोपाल से मिलने आया, पर वह वहां नहीं थे।”

उनके मुताबिक, “हर समिति में मुस्लिमों का कम ही प्रतिनिधित्व होता है। घोषणा-पत्र वाली समिति में महज दो मुसलमानों क शामिल किया गया था। मुस्लिमों के मसले उठाना महत्वपूर्ण है। अगर आप मुस्लिमों से इतना डरे हैं, तब आपको उनके वोट क्यों चाहिए?”

महाराष्ट्र कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर 8 कमेटियों का एलान किया है, जिसमें को-ऑर्डिनेशन कमेटी समेत कई कमेटियों में हुसैन दलवई का नाम शामिल है, लेकिन स्ट्रेटेजी कमेटी में उनका नाम शामिल नहीं है। जबकि आरिफ नसीम खान को इसमें शामिल किया गया है।

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