पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक बार फिर से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी देश में असरदार विपक्ष नहीं रह गई है। सिब्बल ने एक चैनल से बातचीत में कहा, कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने का कोई प्रयास नहीं कर रही है।

उन्होंने पत्रकार राजदीप सरदेसाई से बातचीत में कहा, राहुल गांधी ने जब ऐलान किया था कि उनकी पार्टी चीफ रहने में दिलचस्पी नहीं है, तब से अब तक कांग्रेस बगैर मुखिया के है। इस बात को लगभग डेढ़ साल हो चुके हैं। क्या पार्टी डेढ़ साल तक बगैर नेता के चल सकती है क्या?…कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को भी नहीं मालूम है कि आखिर उन्हें भविष्य में क्या करना है या कहां जाना है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालिया चुनावों से स्पष्ट हो गया कि यूपी जैसे राज्यों में कांग्रेस का कोई प्रभाव नहीं बचा है। इसके अलावा गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से था, वहां नतीजे बेहद खराब आए।

उन्होंने कहा, ‘हम गुजरात की सभी आठ सीटें हार गए। 65% वोट बीजेपी के खाते में चले गए जबकि ये सीटें पाला बदलने वाले कांग्रेसियों ने खाली की थीं। मध्य प्रदेश में सभी 28 सीटें कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने के कारण ही खाली हुई थीं, लेकिन पार्टी सिर्फ आठ सीटें जीत पाई।’

सिब्बल ने कहा, ‘जहां भी सीधे बीजेपी से दो-दो हाथ होता है, हम वहां असरदार विकल्प साबित नहीं हो पा रहे हैं। कुछ-न-कुछ तो जरूर गलत हो रहा है। हमें इसे लेकर कुछ करना ही होगा।’ सिब्बल ने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्होंने जुलाई में हुई पार्टी की संसदीय समूह की बैठक में मुद्दे उठाए थे। फिर 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को अगस्त में खत भी लिखा था, पर उस पर न तो कोई चर्चा हुई और न ही उन लोगों के पास इस मसले को लेकर कोई आगे आया।

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