एक-दूसरे की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली भाजपा और कांग्रेस आखिरकार एक साथ आ ही गई। आदिवासी बहुल उदयपुर संभाग के डूंगरपुर जिले में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) को रोकने के लिए दोनों दलों ने हाथ मिला लिया।परिणामस्वरूप भाजपा की सूर्यादेवी कांग्रेस के समर्थन से जिला प्रमुख निर्वाचित हो गई।

दरअसल, जिला परिषद चुनाव में बीटीपी ने 27 निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था, इनमें से 13 ने जीत हासिल की थी। जबकि भाजपा को 8 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। माना जा रहा था कि जिला प्रमुख पद पर बीटीपी को आसानी से जीत हासिल हो जाएगी।

इसके लिए बीटीपी समर्थित सभी 13 जिला परिषद सदस्यों ने अपनी उम्मीदवार पार्वती डोडा को समर्थन दिया। लेकिन भाजपा-कांग्रेस के सदस्यों ने भाजपा की सूर्यादेवी के पक्ष में वोट किए और बीटीपी की प्रत्याशी पार्वती देवी एक मत से हार गईं।

सूर्य अहरी खुद आदिवासी हैं और 12वीं तक पढ़ाई कर चुकी हैं। वे डुंगरपुर के गलियाकोट पंचायत समिति की पूर्व प्रधान रही हैं। जिला परिषद के प्रमुख पद के लिए उन्हें भाजपा और कांग्रेस की वजह से 14 वोटों के साथ बहुमत मिला। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दिनेश खोडनिया ने बीटीपी को रोकने के लिए यह कदम उठाया।

खोडनिया का मानना था कि यदि बीटीपी का जिला प्रमुख बन गया तो अगले पांच साल में कांग्रेस-भाजपा का यहां सफाया हो जाएगा। ऐसे में इसे रोकना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभु पण्ड्या से बात की और तय रणनीति के तहत यहां भाजपा का जिला प्रमुख निर्वाचित हो पाया।

डूंगरपुर के कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दिनेश खोडनिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी राजनेताओं में से एक हैं। बीटीपी के संस्थापक छोटूभाई वसावा ने ट्वीट में कहा, “बीटीपी नेक है, इसलिए कांग्रेस-भाजपा एक हैं।” उन्होंने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नए गठबंधन के लिए बधाई दी। बता दें कि बीटीपी के राजस्थान के डुंगरपुर से ही दो विधायक हैं, जो कि राज्य में गहलोत सरकार का समर्थन करते हैं।

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