कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने काले धन एवं टेक्स हेवन कंट्री के मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल पर गंभीर आरोप लगाए है।

उनका आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के पुत्र विवेक डोभाल ने 2016 में नोटबंदी की घोषणा के कुछ दिनों बाद केमन आईलैंड में एक ‘हेज फंड’ की शुरुआत की और इसके बाद इस ‘टैक्स हैवेन’ से भारत में आने वाली एफडीआई में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई।

रमेश ने यह भी कहा कि ‘भारतीय रिजर्व बैंक को अप्रैल, 2017 से मार्च, 2018 के बीच केमन आईलैंड से आए 8300 करोड़ रुपये की एफडीआई’ का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए और इसकी पूरी जांच भी करनी चाहिए। उन्होने कहा, यह मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है। खुद अजीत डोभाल ने 2011 में यह मांग की थी कि टेक्स हेवन देशों में जमा राशि की मॉनीटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए फाइनेंसियल इंटेलीजेंस एजेंसी की मदद लेने की भी बात कही थी। आज वे सत्ता में हैं, लेकिन अपनी इस मांग को पूरा नहीं कर रहे हैं।

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उन्होने कहा, डोभाल को यह बताना होगा कि 12 माह में इतनी ज्यादा एफडीआई कैसे आ गई, जो 17 साल में कभी नहीं आ सकी। ये सब बातें आरबीआई की रिपोर्ट में दर्ज हैं। कौन पैसा लाया है या किसका पैसा लगा है, इन सब बातों का वजूद है। रमेश ने कहा, जीएनवाई एशिया के दो निदेशक हैं। एक विवेक डोभाल और दूसरे डॉन डब्लू ई-बैंकस। ये नाम पनामा पेपर और पैराडाइज में भी देखे गए हैं। डोभाल के दोनों बेटों विवेक और शौर्य डोभाल के पास ही ज्यूस स्ट्रेटजिक मेनेजमेंट एडवाइजर का फंड भी है। डोभाल बताएं कि जीएनवाई और ज्सूस का क्या रिश्ता है।

कांग्रेसी नेता ने साफ किया है कि केमन आइसलैंड में फंड खोलना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन नोटबंदी के 13 दिन बाद फंड लेना और फिर एक साल में इतनी कमाई हो गई, जितनी 17 साल में नहीं हुई। ज्यूस फंड का नाम पैराडाइज और पनामा पेपर्ज में शामिल रहा है। यहाँ से जीएनवाई को कितनी मदद मिली है, आरबीआई और डोभाल यह बताएं। क्या कहीं इस मामले में राउंड ट्रिपिंग तो नहीं हुई। देश का पैसा पहले बाहर गया और फिर वापस आ जाता है। एनएसए को इसका स्प्ष्टीकरण देना होगा। कांग्रेस पार्टी इस मामले की जाँच के लिए आरबीआई को पत्र लिखेगी।

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