असम के सीएम ने कहा कि वे चौथी बार सीएम बनने को लेकर आश्‍वस्‍त हैं। उन्‍होंने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ से किसी गठबंधन की संभावनाओं को खारिज किया।

चौथी बार असम का सीएम बनने की कोशिश में लगे तरुण गोगोई आने वाले चुनावों में अपनी जीत को लेकर आश्‍वस्‍त हैं। उनका यह भी मानना है कि बीजेपी और असम गण परिषद् के झगड़े का उन्‍हें फायदा होगा।

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द इंडियन एक्‍सप्रेस के IDEA EXCHANGE कार्यक्रम में आए असम के सीएम ने विभिन्‍न मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की। क्‍या जेएनयू विवाद का असम में कोई प्रभाव है? इस सवाल के जवाब में गोगोई ने कहा, ”हां कुछ असर तो पड़ा है। बहुत सारे लोगों को न पता हो, लेकिन असम में भी 60 के दशक में एक बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था। मैं उसका हिस्‍सा था। हमारे जनरल सेक्रेटरी को हॉस्‍टल से उठा लिया गया और बाद में वे गिरफ्तार किए गए। उस वक्‍त सारा राज्‍य जल रहा था। नेहरू को आना पड़ा। हमने एक मांगपत्र सौंपा। यानी मैंने भी छात्रनेता के तौर पर इस तरह के आंदोलन देखे हैं।” क्‍या उन्‍हें उस वक्‍त देशद्रोही करार दिया गया? इस सवाल के जवाब में गोगोई ने कहा, ”देशद्रोही क्‍या होता है? अगर हम केंद्र साल के कानून का पालन करें तो मुझे हजारों लोगों को जेल में डालना होगा क्‍योंकि हर कोई किसी न किसी चीज की मांग कर रहा है। अगर ऐसा होता तो पूरा असम जेल में तब्‍दील हो जाता। फिर हम इससे कैसेट निपटते? आज भी बहुत सारे लोग उल्‍फा का समर्थन करते हैं। वे (उल्‍फा समर्थक) मेरे साथ भी तस्‍वीरें खिंचवा चुके होंगे। लेकिन जो लोग हिंसा में शामिल होते हैं और हथियार उठाते हैं तो हां (उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए)। नहीं तो मुझे नहीं लगता कि एक्‍शन की जरूरत है। हमारे दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे। वे सभी हमारे भाई बहन हैं।”

‘आरएसएस असली हिंदू नहीं’ एक सवाल के जवाब में गोगोई नहीं कहा, ”हिंदू धर्म का मतलब सहिष्‍णुता है। आरएसएस (के सदस्‍य) असली हिंदू नहीं हैं। यह मेरी थ्‍योरी है। मैं मानता हूं कि मैं हिंदू हूं। सहिष्‍णुता ही असली हिंदुत्‍व है। आरएसएस सिर्फ असम, उसकी संस्‍कृति और परंपराओं को प्रदूषित करने जा रहा है। (Jansatta)

पूरा कार्यक्रम देखें वीडियो में 

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