कोहिमा:पूर्वोत्‍तर भारत में नागरिकता संशोधन बिल, 2016 का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। असम के बाद अब मेघालय में भी केंद्र की बीजेपी सरकार को झटका लग सकता है। नैशनल पीपल्‍स पार्टी (एनपीपी) के अध्‍यक्ष और मेघालय के मुख्‍यमंत्री कोनार्ड संगमा ने इस मुद्दे पर एनडीए से अलग होने की धमकी दी है।

संगमा ने कहा कि एनपीपी की शनिवार (09 फरवरी) को हुई महासभा में इस आशय का एक प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने बताया कि एनपीपी मेघालय के अलावा अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड की सरकारों को समर्थन दे रही है। महासभा में इन चारों पूर्वोत्तर राज्यों के पार्टी नेता मौजूद थे।

संगमा ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘‘पार्टी ने एकमत से एक प्रस्ताव अपनाया है जिसमें नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 का विरोध करने का निर्णय किया गया है। अगर यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो जाता है तो एनपीपी एनडीए के साथ अपना गठबंधन तोड़ देगा।’’ उन्होंने कहा कि यह निर्णय आज महासभा में किया गया। बता दें कि यह विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में 8 जनवरी को लोकसभा से पारित हो चुका है और सरकार को इस सत्र में राज्यसभा की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले 8 जनवरी को लोकसभा में इस विधेयक के पारित होने के बाद संगमा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि बीजेपी से संबंध तोड़ने पर वह अपनी पार्टी के नेताओं से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा था, ‘इस विधेयक का पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि हमने इसका व्यापक तौर पर विरोध किया है।’

क्या है नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 ?

इस विधेयक को लोकसभा में ‘नागरिकता अधिनियम’ 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के माध्यम से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना किसी वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके लिए उनके निवास काल को भी 11 वर्ष से कम करते हुए छह वर्ष कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी 6 वर्ष बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए अर्जी दे सकते हैं।

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