नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 ( Citizenship Amendment Bill 2019 ) (कैब) नहीं लागू करने के राजस्थान सरकार ने संकेत दे दिये है। इससे पहले पशिचम बंगाल, पंजाब, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार इस कानून को लागू करने से साफ इंकार कर चुकी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने गृह विभाग (Home department) के आला अधिकारियों को इस कानून पर मंथन करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार देर रात तक गृह विभाग के अधिकारी विधि विभाग से राय लेते रहे।

दूसरी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीधे राजस्थान को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन कैब को कोई भी प्रदेश स्वीकार नहीं कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, बदहाल अर्थव्यवस्था है और भाजपा नेताओं पर बलात्कार जैसे आरोप लगे हुए हैं। इन मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए भाजपा यह विधेयक लाई है।

वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ( MP CM Kamalnath ) ने कहा है कि विधेयक को लेकर कांग्रेस ने जो भी रुख अपनाया है, हम उसका पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि क्या हम उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं, जो विभाजन का बीज बोती। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी साफ कर दिया कि विधेयक को लेकर कांग्रेस के निर्णय के साथ हैं। यह विधेयक असंवैधानिक है। इसी तरह महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को मानेगा।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 3 दिन पहले बुधवार को ही कांग्रेस ने राजधानी जयपुर में गांधी सर्किल पर धरना देकर इसका विरोध जताया था। इस दौरान सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि केंद्र सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नागरिक संशोधन जैसे कानून ला रही हैं। वहीं डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा था देश में नागरिकता कानून बहुत पुराना है। संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाकर नागरिकता कानून में संशोधन किया जा रहा है।

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