कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस्लाम में तीन तलाक की पूरी प्रथा को मुस्लिम महिलाओं की बर्बादी के लिए जिम्मेदार ठहराया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि क बार में तीन तलाक भले ही खत्म हो गया हो लेकिन ‘तलाक’ देने के दो अन्य तरीके अभी भी कायम हैं और ये लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता के लिए चुनौती हैं.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘एक बार में तीन तलाक’ की व्यवस्था कुरान के मौलिक कानूनी सिद्धांतों को तोड़मरोड़ कर बनाई गई थी और शीर्ष अदालत द्वारा इसे असंवैधानिक घोषित करना अच्छा रहा.

उन्होंने आगे कहा, यह स्पष्ट हो गया. केवल एक बार में तीन तलाक ही गैरकानूनी हुआ है, तलाक के दो अन्य तरीके भी लैंगिक न्याय तथा लैंगिक समानता के लिए चुनौती हैं.

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि फैसला बहुमत से आना लैंगिक न्याय और पति तथा पत्नी की बराबरी की जोरदार ढंग से पुष्टि करता है.

गौरतलब रहें कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल तलाक-ए-बिद्दत (एक बार में तीन तलाक) को अमान्य करार दिया. इसके अलावा तीन तलाक में दो तरीके और है तलाक अहसन. जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नहीं कहा.

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