सुभाष चंद्र बोस के पोते और बीजेपी सांसद चंद्र कुमार बोस ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना धर्मनिरपेक्ष नेता थे। वे कभी भी देश का बंटवारा नहीं चाहते थे।

स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेता सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर चंद्र कुमार ने कहा कि जिन्ना कांग्रेस द्वारा मजबूर किए गए थे। उन्होंने 1940 के लाहौर सम्मेलन में पाकिस्तान का मुद्दा उठाया था, इसलिए उन्हें लगा कि वे भारत में सत्ता साझा नहीं कर सकते।

उन्होने आगे कहा, सरदार पटेल, पंडित (जवाहरलाल) नेहरू और यहां तक कि महात्मा गांधी ने भी इस विभाजन को न चाहते हुए स्वीकार किया। 1955 तक पाकिस्तान धर्मनिरपेक्ष था, लेकिन जिन्ना के निधन के बाद इस्लामिक राष्ट्र बन गया। लेकिन भारत धर्मनिरपेक्ष रहा और यही देश की आत्मा है।

चंद्र कुमार ने कहा- ‘जय हिंद’ नारे का इस्तेमाल आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज में किया गया था। यह सभी धर्म, समुदाय, जाति और पंथों को जोड़ता है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों को ‘जय हिंद’ का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आजाद हिंद फौज की भावना को पूरे देश में अपनाया जाए तो सभी लोग धर्मनिरपेक्षता की राह पर चलेंगे।

बता दें कि चंद कुमार बोस पश्चिमी बंगाल में बीजेपी के उपाध्यक्ष हैं। मोहम्मद अली जिन्ना को बीजेपी दो राष्ट्र की मांग का जिम्मेदार मानती आई है।

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