Tuesday, January 25, 2022

CAA पर बोले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते – ‘बहुमत होने से डराने की राजनीति नहीं कर सकते’

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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच भारतीय जनता पार्टी के नेता और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने बड़ा बयान दिया है. बोस ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में नागरिकों पर कानून नहीं थोपा जाना चाहिए.

न्यूज एजेंसी एएनआई ने उनके हवाले से लिखा है, ‘मैंने अपने पार्टी नेतृत्व को सुझाव दिया है कि थोड़े से संशोधन के साथ पूरा विपक्ष के अभियान को ठप किया जा सकता है. हमें विशेष रूप से यह बताने की जरूरत है कि यह अत्याचार झेल रहे अल्पसंख्यकों के लिए है, हमें किसी धर्म का उल्लेख नहीं करना चाहिए. हमें अपना नजरिया बदलना होगा.’

उन्होंने कहा है, ‘जब एक बिल कानून के रूप में पास हो जाता है तो यह कानूनी रूप से राज्य सरकारों के लिए बाध्यकारी हो जाता है, लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में आप नागरिकों पर किसी भी कानून को जबरन नहीं लागू कर सकते. हमारा काम लोगों को यह समझाना है कि हम सही हैं और वे गलत हैं. सिर्फ इसलिए कि आज हमारे पास संख्या है, हम डराने की राजनीति नहीं कर सकते. हमें लोगों को नागरिकता कानून के फायदों के बारे में लोगों को बताना चाहिए.’

चंद्र कुमार बोस ने कहा कि मैंने अपने पार्टी नेतृत्व को थोड़े से संशोधन का सुझाव दिया था, उससे विपक्ष का पूरा अभियान फेल हो जाता. हमें विशेष रूप से यह बताने की आवश्यकता है कि सीएए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है, हमें किसी धर्म का उल्लेख नहीं करना चाहिए. हमारा दृष्टिकोण अलग होना चाहिए.

इससे पहले भी बोस सीएए को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘यदि सीएए 2019 किसी धर्म से जुड़ा नहीं है तो क्‍यों हम हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाइयों, पारसियों और जैन लोगों पर ही जोर दे रहे हैं. क्‍यों मुस्लिमों को शामिल नहीं किया जाता? हमें पारदर्शी बनना चाहिए. यदि मुस्लिमों के साथ उनके गृह देश में उत्‍पीड़न नहीं होगा तो वे नहीं आएंगे, इसलिए उन्‍हें शामिल करने में कोई नुकसान नहीं है.’

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