Tuesday, January 25, 2022

CAA के विरोध में केरल सीएम पिनाराई विजयन का 11 राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 11 राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश, पुदुचेरी, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है।

पत्र में उन्होने कहा कि धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है। लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिये सभी भारतीयों का एकजुट होना समय की मांग है। पत्र में उन्होंने सीएए के खिलाफ केरल विधानसभा के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि बाकी राज्य भी इस तरह के कदम पर विचार कर सकते हैं।

इस पत्र में उन्होंने कहा है कि सीएए के परिणामस्वरूप हमारे समाज के बड़े वर्गों के बीच आशंकाएं बढ़ गई हैं, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के हमारे मूल्यों की रक्षा और संरक्षण के लिए सभी भारतीयों के बीच यूनिटी कायम रखना इस समय की आवश्यकता है। अलग-अलग समुदाय के लोग, चाहे वे किसी भी धर्म के हों भारतीयता के मूल सिद्धांतों को संरक्षित करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कानून के खिलाफ हो रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केरल विधानसभा ने मंगलवार को सीएए को निरस्त करने की मांग संबंधी एक प्रस्ताव को पारित किया। हालांकि, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का कहना है कि केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव असंवैधानिक है और इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है।

प्रस्ताव पारित होने के कुछ घंटे बाद कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने वाम सरकार पर निशाना साधा और कहा कि विजयन को ‘‘बेहतर कानूनी सलाह’’ लेनी चाहिए। प्रसाद ने कहा था कि नागरिकता के संबंध में कानून पारित करने की शक्ति केवल संसद के पास है न कि विधानसभा के पास।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य जी वी एल नरसिम्ह राव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर केरल के मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और अवमानना कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया।

विशेषाधिकार हनन के बारे में पूछने पर विजयन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘राज्य विधानसभाओं के अपने विशेषाधिकार होते हैं। ऐसे कदम के बारे में कहीं भी सुनने को नहीं मिला है, लेकिन हम मौजूदा परिस्थिति में किसी भी चीज से इनकार नहीं कर सकते क्योंकि आजकल देश में अप्रत्याशित चीजें हो रही है।’’

उन्होंने कहा कि विधानसभाओं के पास अपना विशेष संरक्षण है और इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केरल इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य है। यह कानून संविधान के मौलिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

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