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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. साथ ही उन्होंने कहा वह कभी भी बीजेपी के साथ गठबंधन या मदद से सरकार नहीं बनाएंगी. मायावती ने कहा कि वह कभी नहीं भूल सकतीं कि 2003 में ताज कोरिडोर केस में बीजेपी ने उन्हें किस तरह टार्गेट किया था.

उन्होंने कहा कि बीएसपी एक राजनीतिक दल के साथ एक मूवमेंट भी है. गैरबराबरी के खिलाफ समतामूलक समाज बनाने के लिए हमारी पार्टी काम कर रही है। हमने देख लिया है कि सभी पार्टी बातें तो करती हैं लेकिन इस विचारधारा से किसी की विचाराधारा मेल नहीं खाती है। ऐसे में गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता.

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इसके अलावा उन्होंने बीजेपी की मदद से सरकार बनाने से इनकार करते हुए दावा किया कि वह चुनाव में बहुमत हासिल करेंगी, इसलिए किसी की मदद की जरूरत ही नहीं. साथ ही उन्होंने  मुसलमानों को सचेत करते हुए कहा कि ऐसे में मुसलमान सपा को अपना वोट देकर बर्बाद न करें। ऐसा करके वे बीजेपी की मदद करेंगे.

इसके अलावा उन्होंने सपा में आतंरिक कलह को लेकर कहा कि सकी झलक सपा के रजत जयंती समारोह में भी दिखी। सपा अपने पारिवारिक वर्चस्व की लड़ाई को कितना भी छिपाने की कोशिश करे लेकिन हकीकत यह है कि चुनाव में जिन सीटों पर अखिलेश और शिवपाल समर्थित प्रत्याशी आमने-सामने होंगे, वहां इन दोनों के समर्थक एक-दूसरे को हराने की भरपूर कोशिश करेंगे.

लिहाजा मुस्लिमों और प्रदेश के अन्य सभी वर्गों व धर्मों के सेक्युलर लोगों को सपा को मत देकर अपना वोट नहीं खराब करना चाहिए वर्ना इसका सीधा फायदा दलित, पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी भाजपा को मिलेगा.

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