नई दिल्ली | सोमवार को बसपा के प्रमाणिक ट्वीटर अकाउंट से एक पोस्टर पोस्ट किया गया. इसके थोड़ी देर बाद ही या पोस्टर मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस पोस्टर में मायावती के साथ साथ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं की तस्वीर लगी हुई थी. चौकाने वाली बात यह थी की पोस्टर में मायावती के साथ साथ उनके सबसे बड़े दुश्मन दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी तस्वीर लगी थी.

इस पोस्टर के जरिये सभी विपक्षी दलों से अपील की गयी थी की वो सामाजिक न्याय के लिए एक हो जाये. चूँकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने 27 अगस्त को पटना में बीजेपी भगाओ देश बचाओ रैली आहूत की हुई है, इसलिए इस पोस्टर को भी उसी रैली से जोड़कर देखा गया. इस रैली में सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आने का न्यौता दिया गया है. इसमें मायवती के साथ साथ अखिलेश को भी निमंत्रण भेजा गया है. सूत्रों के मुताबिक दोनों ही नेताओ ने रैली में आने के लिए भी हामी भर दी है.

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लेकिन पोस्टर के मीडिया में वायरल होते ही बसपा की और तुरंत इसका खंडन कर दिया गया. बसपा के वरिष्ठ नेता सतीश चन्द्र मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा की हमारा कोई भी अधिकारिक ट्वीटर हैंडल नही है. इसलिए बसपा की और से इस तरह का कोई भी पोस्टर जारी नही किया गया है. मायावती और उनकी पार्टी ने अपने प्रमाणिक ट्वीटर अकाउंट से पल्ला झाड़ते हुए कहा की इस सोशल मीडिया साइट के माध्यम से जारी किये गए पोस्टर के संबंध में प्रकाशित और प्रसारित सभी खबरें गतल तथा मिथ्या प्रचार हैं.

मायावती की और से यह भी कहा गया की वो अपने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए हिंदी में प्रेस नोट जारी करती है जिससे की देश की अधिकतम जनता तक उनकी बात विस्तार तक पहुँच सके. जबकि ट्विटर में इस तरह की सुविधा उपलब्ध नही है. पोस्टर के बारे में अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा की हम सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की बात करते है जबकि पोस्टर में बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय की बात कही गयी है. मायावती की और से बसपा के प्रमाणिक ट्वीटर अकाउंट से पल्ला झाडते ही ट्विटर ने @BspUp2017 ट्वीटर अकाउंट को ससपेंड कर दिया.

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