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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी  बीएमसी के बजट में मुसलामानों के लिए आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग की हैं. ओवैसी की मांग पर भड़कते हुए बीजेपी चुनाव आयोग के पास ओवैसी की शिकायत करने पहुंची हैं.

रविवार को मुंबई के नागपाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में ओवैसी ने कहा था कि स्थानीय निकायों के बजट में मुस्लिमों की आबादी के अनुपात में फंड वितरित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुंबई का बजट 36,000 करोड़ रुपये हैं और इस शहर में 21 प्रतिशत मुस्लिमों की आबादी है. इसके अनुसार, मुस्लिमों के विकास के लिए 7700 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने चाहिए, जो नहीं किया गया.

ओवैसी ने रैली में बीएमसी में सत्तारूढ़ शिवसेना-बीजेपी गठबंधन पर जमकर निशाना साधते हुए कहा, “मुंबई के उर्दू स्कूलों में कहीं भी टीचर नहीं हैं. ना ही किसी तरह का बुनियादी ढांचा है. बीएमसी के पास 37,000 करोड़ रुपए का बजट है लेकिन कोई विकास नहीं हुआ. अगर उन्होंने बजट का सही इस्तेमाल किया होता तो शहर में कहीं ज्यादा सुविधाएं मिली होतीं. सारे उर्दू स्कूल बंद हो रहे हैं.”

ओवैसी ने कहा कि बेहराम बाग मेटरनिटी अस्पताल बंद पड़ा है. यही हाल मुस्लिम आबादियों में बहुत सारी डिस्पेन्सरियों का है. मुस्लिमों को बीएमसी से उनका हक नही मिल रहा और उनकी अनदेखी की जा रही है. ओवैसी ने वादा किया कि अगर उनकी पार्टी बीएमसी में सत्ता में आई मुस्लिमों के लिए फंड रखा जाएगा.

इस भाषण के खिलाफ सोमवार को बीजेपी ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया. मुंबई बीजेपी की तरफ से अध्यक्ष अशीष शेलार ने राज्य निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और सांसद ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई.


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