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गोड्डा : कलाली से कन्हवारा गांव में कझिया नदी पर 21 करोड़ की लागत से बनने वाले हाइलेवल पुल के शिलान्यास के मौके पर भाजपा कार्यकर्ता द्वारा बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे के पैर धोकर उसी पानी को पीने का मामला सामने आया है।

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपनी फेसबुक वाल पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए कार्यकर्ता की काफी प्रशंसा की, हालांकि आलोचना के शिकार होते देख काफी देर के बाद उन्होंने उस पोस्ट को एडिट कर पांव पखार कर पीने की बात को हटा दिया।

इस तस्वीर को अपने फेसबुक पर डालते हुए सांसद ने लिखा कि आज मैं खुद को बहुत छोटा कार्यकर्ता समझ रहा हूं। उन्होंने बताया कि भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह ने पुल बनाने की खुशी में हजारों लोगों के सामने उनके पैर धोए। उन्होंने आगे ऐसी इच्छा भी जताई कि उन्हें भी यह मौका मिले और वह भी कार्यकर्ता के पैर धोकर ‘चरणामृत’ पिएं।

विवाद बढ़ता देख उन्होने अपनी सफाई में लिखा कि “अपनों में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ?” उन्होंने संस्कृति और परंपरा के हवाले से कहा कि पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है। सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएँ क्या यह नहीं करती हैं?

उन्होंने अपनी आलोचना को गलत ठहराते हुए लिखा कि इसे राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है? अतिथि के पैर धोना गलत है तो अपने पुरखों से पूछिए कि महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोए थे? लानत है घटिया मानसिकता पर।

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