बीजेपी की और से जम्मू-कश्मीर मे अचानक से महबूबा सरकार से समर्थन लिए जाने से मची राजनीतिक उथल-पुथल ने न केवल देश को बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया।बीजेपी ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेने का एलान कर दिया।

इस मामले मे आल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ”पीडीपी ने खुद अपने लिए यह राजनीतिक आपदा खड़ी की है। मुझे लगता है कि पीडीपी के लिए अभी कोई स्थान नहीं है, यह पीडीपी के लिए एक सबक है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए भी।

उन्होने कहा, बीजेपी और पीडीपी दोनों इस बात से सहमत होंगे कि यह उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव का गठबंधन था. देश की जनता जनता जानना चाहती है इस उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की बैठक का क्या हुआ? आशा है कि कश्मीर की जनता शांति से काम लेगी, यह एक दुर्भाग्य पूर्ण फैसला है। बीजेपी सरकार देने के वादे से भाग नहीं सकती। बीजेपी इसके लिए बराबर की जिम्मेदार है।

ओवैसी ने कहा कि बीजेपी चाहती है कि जम्‍मू और कश्‍मीर से धारा 370 हट जाए। उन्‍होंने यह भी कहा कि जम्‍मू और कश्‍मीर में खराब हालात के लिए बीजेपी ही जिम्‍मेदार है। ओवैसी ने मामले में कहा कि बीजेपी जम्‍मू और कश्‍मीर में गवर्नर रूल लागू करना चाहती है। इससे वहां के हालात सुधरने के बजाय बिगड़ेंगे। इससे राज्‍य में दमन बढ़ेगा।

मुफ्ती की ओर से इस्‍तीफा देने से पहले बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह और राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के बीच हुई मुलाकात पर भी ओवैसी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्‍होंने कहा ‘हम और पूरा देश जानना चाहता है कि अमित शाह और एनएसए डोभाल के बीच मुलाकात में क्‍या बातचीत हुई।

उन्‍होंने कहा कि ऐसा क्‍यों हुआ कि एनएसए ने सिर्फ एक ही राजनीतिक दल (बीजेपी) के अध्‍यक्ष से मुलाकात कर बातचीत की। एनएसए सभी राजनीतिक दलों के अध्‍यक्षों से क्‍यों नहीं मिले।

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