क्या मुजफ्फरनगर दंगो की याद दिलाकर जाटो का वोट बटोर पायेगी बीजेपी ?

मुजफ्फरनगर | जाट लैंड के नाम से मशहूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टी इस बिरादरी को साधने में लग जाती है. सभी दल जानते है की इस बिरादरी के समर्थन के बिना यहाँ की सीटो पर जीतना मुमकिन नही है. यही कारण है की बीजेपी जाटो को लुभाने के लिए आरक्षण से लेकर मुजफ्फरनगर दंगो तक का राग अलाप रही है.

2014 में हुए लोकसभा चुनावो में बीजेपी को मिली बम्पर जीत में उत्तर प्रदेश का बड़ा योगदान रहा. बीजेपी ने यहाँ 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल की. कही न कही इसका कारण मुजफ्फरनगर दंगो को माना जाता है. दंगो के बाद पुरे प्रदेश में हिन्दू वोटो का रुझान बीजेपी की और हो गया. उस समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी सीटो पर बीजेपी ने बाकी दलों का सफाया कर दिया था.

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दंगो की वजह से पूरी जाट बिरादरी ने बीजेपी का समर्थन किया था. लेकिन पिछले ढाई सालो में जाट बिरादरी का रुझान बीजेपी की और से घटा है. दरअसल दंगो के बाद 6 हजार लोगो के खिलाफ अपराधिक मुकदमे दर्ज किये गए. जिसको लेकर बीजेपी सरकार का रुख उदासीन ही रहा. इसके अलावा हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान खट्टर सरकार की कार्यवाही से भी यह समुदाय काफी नाराज हुआ.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावो में जाट बिरादरी ने पंचायत कर बीजेपी का विरोध करने का फैसला किया है. यही बात बीजेपी को काफी परेशान कर रही है. यही कारण है की बीजेपी के वरिष्ठ नेताओ के अलावा स्थानीय नेता भी जाटो को मुजफ्फरनगर दंगो की याद दिलाकर अपनी और करने का प्रयास कर रही है. इसके अलावा बीजेपी जाटों को यह भी बता रही है की उनको उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में बीजेपी सरकार ने ही आरक्षण का लाभ दिया था.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 19 जिलो की 90 विधानसभा सीटों पर यह बिरादरी निर्णायक भूमिका में है. इन जिलो में जाट बिरादरी करीब 22 फीसदी है. इनको लुभाने के लिए बीजेपी लोगो को यह भी बताने से नही हिचक रही है की उन्होंने बाकी पार्टियों के मुकाबले जाटो को सबसे ज्यादा टिकेट दिया है. मालूम हो की बीजेपी ने 15 जाट उम्मीदवार मैदान में उतारे है.

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