नई दिल्ली | 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावो के नतीजो से कांग्रेस को खुश होना चाहिए या आत्ममंथन करना चाहिए, इस बारे में खुद पार्टी भी बड़ी असमंजस स्थिति में दिखाई दे रही है. दरअसल कांग्रेस ने पांच राज्यों में से तीन अच्छा प्रदर्शन किया है. पंजाब में तो कांग्रेस ने बाकी दलों का सफाया करते हुए भारी बहुमत हासिल किया है वही मणिपुर और गोवा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

इन्ही नतीजो की वजह से कांग्रेस असमंजस में है. क्योकि गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिया गया. इनमे से गोवा में मनोहर परिकर शपथ ले चुके है जबकि मणिपुर में बुधवार को शपथ दिलाई जाएगी. मतलब साफ़ है की जनमत मिलने के बावजूद कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी. इसकी कसक राहुल गाँधी के बयानों में साफ देखी जा सकती है.

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राहुल ने गोवा और मणिपुर में बीजेपी सरकार बनने पर कहा की बीजेपी जनमत को धनबल से चुराने का प्रयास कर रही है जो लोकतंत्र के लिए खतरा है. राहुल ने बीजेपी पर धुर्विकरण की राजनीती करने का आरोप लगाते हुए कहा की बीजेपी ने वेस्ट यूपी में धुर्विकरण कर वोट हासिल की वही गोवा और मणिपुर में जनमत को चुराने का प्रयास किया जा रहा है. हालाँकि राहुल ने पांच राज्यों के नतीजो के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली.

उन्होंने कहा की मैं मानता हूँ की उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हम काफी नीचे गए है. अब हम विपक्ष में है और राजनीती में उतार चढ़ाव आते रहते है. लेकिन हमने पांच राज्यों में से पंजाब में सरकार बनाये और मणिपुर और गोवा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. लेकिन फिर भी हम बीजेपी की विचारधारा के साथ लड़ते रहेंगे. पार्टी में कुछ बदलाव करने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा की संगठन में कुछ फेरबदल किया जाएगा.

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