Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

बेरोजगारी पर बीजेपी सांसद ने उठाया सवाल – लोगों की नौकरियां जा रही, सरकार क्या कर रही?

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हाल ही में कोयंबटूर नगर निगम में 549 सेनेटरी वर्करों के पदों के लिए कुल 7000 इंजीनियरों, स्नातकों और डिप्लोमा धारकों के आवेदनों ने देश भर का ध्यान बढ़ती बेरोजगारी की और आकर्षित किया। शुक्रवार को कई सांसदों ने इस पर चिंता भी जताई। इनमें बीजेपी के राज्यसभा सदस्य देवेंदर पाल वत्स भी शामिल हैं।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसदों ने सरकार से जानना चाहा कि लोगों की नौकरियां जाने और बेरोजगारी दर में इजाफा होने की क्या वजह है और सरकार इस बारे में क्या कदम उठा रही है। जिस पर जवाब वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिया। गोयल ने कहा कि नौकरियों में बड़े स्तर पर हुई किसी छंटनी के प्रामाणिक सबूत नहीं मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्किल डेवलपमेंट पर काफी ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है।

हरियाणा से बीजेपी के राज्यसभा सदस्य ने मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियां पैदा करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। इसके जवाब में पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि के नाम गिनाए। बता दें कि पिछले हफ्ते कौशल विकास मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने सदन को जानकारी दी थी कि मुद्रा योजना के जरिए 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा की गईं।

हालांकि, उन्होंने जो आंकड़े बताए, वो पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव से पहले बताए डेटा का एक चौथाई था। पीएम ने एक इंटरव्यू में माना था कि इस योजना के जरिए कम से कम 4 करोड़ नई नौकरियां पैदा हुईं। पीएम ने कहा था कि इस योजना के तहत कम से कम 4 करोड़ लोग ऐसे थे, जिन्होंने पहली बार लोन लिया। पीएम के मुताबिक, इन सभी ने कुछ न कुछ रोजगार जरूर पैदा किया होगा।

पूरक सवाल पूछते हुए वत्स ने बताया कि बेरोजगारी की दर करीब 8.5 प्रतिशत तक पहुंच रही है। बीजेपी सदस्य ने यह जानना चाहा कि इन सरकारी योजनाओं के जरिए कब तक बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाएगी। इसके जवाब में गोयल ने कहा, ‘आधुनिकीकरण और तकनीकी अपग्रेड की वजह से रोजगार पर अस्थाई असर पड़ा है।

सरकार स्किल डेवलपमेंट पर बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है।’ अपने दूसरे पूरक प्रश्न में वत्स ने पूछा, ‘मंदी की वजह से बहुत सारे कामगारों की छंटनी हो रही है। नौकरियां गवाने वाले कर्मचारियों के कल्याण के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?’

गोयल ने इसके जवाब में कहा कि इस बात के प्रामाणिक या विस्तृत सबूत नहीं मिले हैं कि कर्मचारी बड़े पैमाने पर नौकरियां गंवा रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ मौकों पर अनुपलब्धता या दूसरी वजहों से कोई खास संगठन अपना कामकाज जारी नहीं रख सका। मंत्री ने कहा कि देश के श्रम कानूनों में ऐसे मामलों में दिए जाने वाले मुआवजे और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधान भली भांति तरीके से परिभाषित हैं।

बता दें कि नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गजाइनेशन के सर्वे में यह बात सामने आई थी कि 2017-18 में देश में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत थी जो 1972-73 के बाद सबसे ज्यादा है। सरकार इस रिपोर्ट को छह महीने तक दबाए रही और आम चुनाव के बाद जारी किया था।

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