गोरखपुर | उत्तर प्रदेश में बीजेपी पिछले 14 साल से सत्ता से दूर है. बीजेपी को उम्मीद है की उनका यह वनवास इन विधानसभा चुनावो में खत्म हो जायेगा. लेकिन उनकी राह इतनी भी आसान नही है. बागियों से लेकर विपक्षी दलों की मजबूत स्थिति उनके लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है. खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी को उन्ही के सांसद योगी आदित्यनाथ की पार्टी से कड़ी टक्कर मिल रही है.

साल 2002 में बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी का गठन किया था. योगी की यह पार्टी वैसे तो अराजनैतिक है लेकिन इसका काम प्रदेश में हिंदुत्व के एजेंडे को जिन्दा रखा था. खुद योगी भी प्रदेश में बीजेपी की तरफ से हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा है. अब यही हिन्दू युवा वाहिनी , पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है.

हिन्दू युवा वाहिनी अब दो धडो में बंट चुकी है. एक धड़े ने बगावत करते हुए बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए है. जबकि एक धडा , खुद बीजेपी के टिकेट से चुनाव लड़ रहा है. हिंदू युवा वाहिनी के राज्य प्रभारी राघवेंद्र सिंह डुमरियागंज से बीजेपी के टिकेट पर चुनाव लड़ रहे है जबकि खुद को वाहिनी का राज्य अध्यक्ष बताने वाले सुनील सिंह ने बीजेपी के खिलाफ 20 उम्मीदवार उतारे है.

इन 20 उम्मीदवारो में से 14 हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य है और बाकी शिवसेना के. सभी उम्मीदवार शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर मैदान में है. सुनील सिंह ग्रुप के सदस्य और वाहिनी के महामंत्री महामंत्री राम लक्ष्मण ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की हमने वाहिनी को 15 साल दिए है, हमें कुछ नही मिला. दरअसल सुनील सिंह खुद बीजेपी से टिकेट चाह रहे थे लेकिन राघवेन्द्र सिंह को टिकेट मिलने से ये लोग बागी हो गए.

हालाँकि राघवेन्द्र सिंह इस पर सफाई देते हुए कहते है की वाहिनी की और से कोई भी उम्मीदवार खड़ा नही किया गया है. जो उम्मीदवार खड़े है वो वाहिनी के सदस्य नही है और जो विरोध कर रहा है उनको जल्द ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. मालूम हो की हिन्दू युवा वाहिनी का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, मऊ, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर जिलो में माना जाता है.


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