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मुस्लिम समुदाय को उनकी आबादी के अनुरूप टिकट न देकर आलोचना झेल रही बीजेपी ने बीते 38 साल से विधानसभा चुनावों में राजधानी जयपुर में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया है।

वहीं दूसरी और कांग्रेस ने 2008 व 2013 मेंं शहर के किशनपोल व आदर्शनगर विधानसभा क्षेत्रों से मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे, लेकिन वोटों के धुव्री करण के कारण वो मात खा गए। इनकी हार का एक बड़ा कारण इन दोनों क्षेत्रों में बड़ी तादाद में मुस्लिम प्रत्याशियों का मैदान में उतरना भी रहा है।

जौहरी बाजार सीट से 1980 में कांग्रेस के तकीउद्दीन ने भाजपा के शिखर चंद को 1635 वोट से हराया था। जबकि 1998 में तकीउद्दीन ने ही भाजपा के कालीचरण सराफ को 3 हजार 113 वोट से हरा कर विधायक बने। हालांकि 1985 में तकीउद्दीन भाजपा के कालीचरण सराफ से 2 हजार 552 वोटों से हार भी चुके थे।

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भाजपा के कालीचरण सराफ ने 1990 में कांग्रेस के सैय्यद खान को 24 हजार 875 वोट से हराया था। कांग्रेस ने शाह इकरामुद्दीन को 1993 में किशनपोल और 2003 में जौहरी बाजार से मैदान में उतारा, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाए। वे किशनपोल में रामेश्वर भारद्वाज व जौहरी बाजार में कालीचरण सराफ से चुनाव हार गए थे।

जिले में आदर्शनगर, किशनपोल व हवामहल क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य वाले इलाके माने जाते हैं। लेकिन यहां से भी कभी मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाए। अल्पसंख्यक बाहुल्य वाली इस सीट से माहिर आजाद 2008 में 1828 वोट से और 2013 में 3803 वोट से हार चुके हैं। दोनों बार भाजपा के अशोक परनामी ने जीत हासिल की। यहां से 2008 में 18 में से 9 और 2013 में 32 में से 17 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में रहे।

वहीं किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस ने 2008 में अश्क अली टांक और 2013 में अमीनुद्दीन (अमीन कागजी) को मैदान में उतारा। लेकिन यहां भी दोनों बार भाजपा प्रत्याशी मोहनलाल गुप्ता को ही जीत मिली। 2013 में 29 में से 16 प्रत्याशी मुस्लिम थे।

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