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रांची: झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड मे बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। उन्होने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एक चिट्ठी भी सौंपी है।

झारखंड विकास मोर्चा का कहना है कि यह चिट्ठी भाजपा के तत्कालीन झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखी है। जिसमे लिखा है कि राज्य में हुए पिछले असेंबली इलेक्शन के बाद उनके दल के छह विधायकों को बीजेपी में शामिल कराने में सबसे बड़ी भूमिका राज्य के मौजूदा सीएम रघुवर दास की थी। मरांडी ने कहा कि इस मामले में बड़े पैमाने पर रुपयों का लेनदेन भी हुआ।

जेवीएम नेता ने बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र कुमार राय के द्वारा कथित रुपये लिखे गए एक पत्र को जारी करते हुए बताया कि उस पत्र में जेवीएम छोड़कर बीजेपी जानेवाले विधायकों को 11 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने कहा कि पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि पैसे किसने दिए और किसकी निगरानी में दिए गए।

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चिट्ठी के मुताबिक- गणेश गंझू, जो सिमरिया के विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये चतरा के सांसद सुनील कुमार सिंह से लिये। मामले की निगरानी राकेश प्रासद कर रहे थे. रणधीर कुमार सिंह, जो सारठ से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये महेश पोद्दार (जो अभी झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं) से लिये। मामले की निगरानी दीपक प्रकाश कर रहे थे।

नवीन जायसवाल, जो हटिया से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये नगर विकास मंत्री सीपी सिंह से लिये। मामले की निगरानी प्रदीप कुमार वर्मा कर रहे थे। अमर कुमार बाउरी, जो चंदनकियारी से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये विधायक विरंची नारायण से लिये। मामले की निगरानी संजय सेठ कर रहे थे। आलोक कुमार चौरसिया, जो डाल्‍टनगंज से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये अनंत ओझा से लिये। मामले की निगरानी उषा पांडे कर रही थीं। जानकी कुमार यादव, जो बरकट्ठा से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री रघुवर दास से लिये. मामले की निगरानी राजेंद्र सिंह कर रहे थे।

मरांडी ने मांग की कि खरीद-फरोख्त करने वाले मुख्यमंत्री रघुवर दास को बर्खास्त किया जाए और पैसे की लेनदेन में शामिल तमाम नेताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाए। इसके अलावा उन तमाम छह विधायकों की सदस्यता तत्काल रद की जाए जिन्होंने पैसे लेकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच सीबीआइ से कराने की मांग भी की है।

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