अहमदाबाद | कुछ महीने बाद गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले है. इन चुनावो में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोबारा सत्ता हासिल करने की रहेगी. जबकि कांग्रेस 22 साल से चल रहे सत्ता के सूखे को खत्म करना चाहेगी. यही वजह है की बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेता आजकल गुजरात में डेरा जमाये हुए है. फ़िलहाल बीजेपी के लिए अगर सबसे बड़ी चुनौती कोई है तो वो है हार्दिक पटेल. 

पाटीदार आन्दोलन के अगुवा और बीजेपी के सबसे बड़े विरोधी के तौर पर उभरे हार्दिक पटेल पुरे गुजरात में घूम घूम कर बीजेपी के खिलाफ प्रचार कर रहे है. माना जाता है की गुजरात में सत्ता का रास्ता पटेल समुदाय से होकर जाता है. जिस और इस समुदाय का रुख होता है ज्यादातर समय वही पार्टी सत्ता में आती है. पिछले कई चुनावो से पटेल बीजेपी को वोट करता है , लेकिन इस बार तस्वीर दूसरी नजर आ रही है.

इसकी एक वजह हार्दिक पटेल भी माना जा रहा है. हार्दिक, पटेल समुदाय को बीजेपी सरकार की वादा खिलाफी याद दिलाते हुए उनसे अपील कर रहे है की अगर उनके पिता भी बीजेपी के लिए वोट मांगने आये तो मत देना. इसके अलावा पिछले एक साल में गुजरात में दलितों पर हुए अत्याचारो ने भी बीजेपी की परेशानी को बढाया है. माना जा रहा है की इस बारे के चुनावो में दलित भी बीजेपी से छिटककर कांग्रेस में जा सकता है.

इसी वजह से बीजेपी काफी चिंतित दिख रही है. इसलिए बीजेपी सरकार ने हार्दिक पटेल को साधने के प्रयास शुरू कर दिए है. इसी कड़ी में शुक्रवार को राजकोट के जिलाधिकारी विक्रांत पांडे की और से बताया गया की सरकार ने हार्दिक पटेल और पाटीदार आरक्षण आन्दोलन के अन्य कार्यकर्ताओ पर से तिरंगे का अपमान करने का मामला वापिस ले लिया है. राज्य गृह मंत्रालय की और से मिले निर्देशों के आधार पर यह फैसला लिया.

हालाँकि हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर इस खबर को गलत बताया है. अमर उजाला की मामले से सम्बंधित एक खबर को शेयर कर उन्होंने कहा की बीजेपी सरकार झूठ बोल रही है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा,’ ग़लत हैं. आज भी भाजपा सरकार के द्वारा मुझ पर 5 केस बरक़रार हैं. चुनावी माहौल में झूठ बोलना भाजपा की आदत हैं.’

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