नई दिल्ली | कहते है जब ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है. कुछ ऐसा ही हो रहा बीजेपी के साथ. पहले दस साल बाद केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी और बाद में 14 साल बाद उत्तर प्रदेश का वनवास खत्म हुआ. फ़िलहाल अगर देश के सियासी नक़्शे को देखा जाए तो बीजेपी लगातार आगे बढ़ रही है. करीब 17 राज्यों में बीजेपी सरकार बना चुकी है. जैसे बीजेपी पर लगातार वोटो की वर्षा हो रही है वैसे ही पार्टी के ऊपर धनवर्षा भी पूरी जोरो से हो रही है.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट अनुसार बीजेपी को पिछले चार साल में कॉर्पोरेट और बिजनेस घरानों का खूब प्यार मिला है. रिपोर्ट में बताया गया की कॉर्पोरेट और बिजेनस घरानों ने जितना चंदा पिछले आठ साल में नही दिया उससे करीब 3 गुना चंदा पिछले चार साल में दे दिया. चौकाने वाली बात यह है की इसमें से करीब 73 फीसदी चंदा बीजेपी को दिया गया. राष्ट्रिय दलों को सबसे ज्यादा चंदा 2014 लोकसभा चुनावो के दौरान मिला.

एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया की वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2015-16 के बीच देश की सभी राष्ट्रिय पार्टियों को 956.77 करोड़ रूपए चंदा प्राप्त हुआ. इनमे से 89 फीसदी चंदा कॉर्पोरेट की तरफ से प्राप्त हुआ. इस चंदे में से अकेले बीजेपी को 705.81 करोड़ रूपए का चंदा मिला. जबकि कांग्रेस 198.16 करोड़ रूपए चंदे तक ही सीमित रही. जहाँ बीजेपी को 2987 लोगो ने चंदा दिया तो वही कांग्रेस को चंदा देने वालो की संख्या केवल 167 थी.

एनसीपी को 50 दान दाताओं ने कुल 50.73 करोड़ रूपए जबकि सीपीएम को 45 दाताओं के जरिए 1.89 करोड़ रूपए दान में मिले. वही सीपीआई को 17 दाताओं के माध्यम से 0.18 करोड़ रुपये दान में मिले. वहीं बसपा का कहना है की उसे 20 हजार रूपए से ऊपर एक भी दान दाताओ ने चंदा नही दिया. जहाँ बीजेपी में 20 हजार रूपए से अधिक दान देने वाले 92 फीसदी थे वही कांग्रेस में संख्या 85 फीसदी रही.

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