वाराणसी | जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते है, सभी पार्टियों में विरोध की लहर उठने लगती है. टिकेट बंटवारे को लेकर लगभग हर पार्टी में असंतोष की भावना पनपती है जिसके परिणामस्वरूप पार्टी के अन्दर बगावत होने लगती है. कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है. यहाँ बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक में बगावत के सुर उठ रहे है. टिकेट काटने से नाराज कुछ नेताओं ने तो निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

लेकिन प्रधनामंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुछ अलग तरह का विरोध देखने को मिल रहा है. यह बीजेपी को लगभग हर विधानसभा में बगावत का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा विरोध कैंट, रोहनिया और शिवपुर विधानसभा में देखने को मिल रहा है. यहाँ कैंट से बीजेपी के सौरभ श्रीवास्तव को प्रत्याशी घोषित किया गया है. अब पार्टी को इनके विरुद्ध भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है.

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इस विधानसभा क्षेत्र में जगह जगह सौरभ श्रीवास्तव के विरोध में पोस्टर लगाए गये है. इस पोस्टर में एक मतदाता ने खुद को कैंट विधानसभा क्षेत्र का मतदाता बताते हुए कहा,’ मैं कैंट विधानसभा का मतदाता हूँ. मैं निरीह, लाचार और बेबस हूँ. 27 वर्षो से माननीया ज्योत्सना श्रीवास्तव एवं स्वर्गीय हरिश्चंद्र श्रीवास्तव को झेल रहा हूँ. आगे इनके पुत्र सौरभ श्रीवास्तव को झेलना है…जब अक की ये अपनी माताजी की तरह वृद्ध न हो जाए’.

इस पोस्टर में आगे लिखा गया,’ क्या फिर सौरभ श्रीवास्तव जी के पुत्रो को भी झेलना पड़ेगा? क्या एक भू माफिया, व्यभिचारी, अहंकारी और विभिन्न मुकदमो को झेल रहे व्यक्ति को झेलना हमारी नियति है. जो व्यक्ति कार्यकर्ताओ से अशिष्ट भाषा में बात करता हो, उसको झेलना हमारी लाचारी बन गयी है? 27 वर्षो से शासन कर रहा यह परिवार कैंट विधानसभा में अपनी एक उपलब्धि बता सकता है? क्या इस परिवार को झेलना बीजेपी के कार्यकर्ताओ और मतदाताओ की बेबसी है’?

इस पोस्टर के जरिये बीजेपी के कार्यकर्ताओ ने पीएम मोदी से अपील की है की वो सौरभ श्रीवास्तव को प्रत्याशी के तौर पर वापिस बुलाये और उन कार्यकर्ताओ में से किसी को मौका दे जो दिन रात पार्टी की सेवा कर रहे है. इन कार्यकर्ताओं ने इस पोस्टर के जरिये यह भी जताने की कोशिश की जिस परिवारवाद के खिलाफ मोदी जी हर बार बोलते है, खुद उनकी पार्टी उसी रास्ते पर चलते हुए परिवारवाद को बढ़ावा दे रही है.

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