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वाराणसी | नोट बंदी के बाद जहाँ पूरा देश कई समस्याओ से जूझ रहा है वही बीजेपी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावो की तैयारी में लगी हुई है. उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापिस आने के लिए बीजेपी पानी की तरह पैसा बहा रही है. एक तरफ लोगो को कैश की भारी किल्लत झेल रहे है वही नोट बंदी से भ्रष्टाचार और कालेधन को समाप्त करने का राग गाने वाली बीजेपी , कैसे करोडो प्रचार पर करोड़ो रूपए खर्च कर ही है यह एक बड़ा सवाल है.

खबर है की बीजेपी ने आगामी विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए सैंकड़ो प्रचार वाहन खरीदे है. अभी 256 बाइक खरीदने का विवाद थमा भी नही था की बीजेपी ने प्रचार वाहनों को खरीद कर विपक्ष को बैठे बिठाये एक और मुद्दा दे दिया. अब विपक्ष , खासकर कांग्रेस , बीजेपी पर भ्रष्टाचार और कालेधन रखने का आरोप लगा रही है. हालाँकि बीजेपी सफाई दे रही है की हमने ये वाहन नोट बंदी से पहले खरीदे थे.

मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इन वाहनों की पहली खेप पहुँच चुकी है. करीब साढ़े चार सौ वाहन ख़रीदे गए है जो चुनाव के दौरान बीजेपी का प्रचार करेंगे. ये एक तरह की वैन है जिसमे कई सुविधाए दी गयी है. इस वाहन में एक LED टीवी, एक टेप रिकॉर्डर और एक स्पीकर लगा हुआ है. इस वाहन के जरिये हर प्रधानमंत्री की मन की बात के कुछ अंश हमेशा चलते रहेंगे.

बीजेपी द्वारा खरीदी गयी इस वैन की कीमत 10 लाख रूपए है. 456 वैन खरीदने का मतलब, बीजेपी ने करीब 45 करोड़ रूपए इन वैन को खरीदने में लगाये है. नोट बंदी के दौर में बीजेपी के पास इतने पैसे कहाँ से आये एक बड़ा सवाल है. क्या बीजेपी ने सारा पेमेंट नकद में किया है या फिर चेक से. उधर कांग्रेस ने वाहनों की खरीद पर सवाल उठाते हुए कहा की यह कदम दिखाता है की बीजेपी भ्रष्टाचार और कालेधन में किस कदर डूबी हुई है.


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