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नई दिल्ली । फ़िलहाल पूरे देश की नज़रें गुजरात चुनाव पर है। आख़िर हो भी क्यों न, यह प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य जो है। कई राज्यों में जीत का स्वाद चखने के बाद अगर भाजपा , गुजरात में हार जाती है तो यह पूरे विपक्ष के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकता है। ख़ासकर कांग्रेस के लिए ये चुनाव बेहद अहम है। 2019 के लोकसभा चुनावों में वापसी करने के लिए कांग्रेस को ये चुनाव किसी भी हाल ने जीतने होंगे।

हालाँकि भाजपा के लिए भी इस बार के चुनाव इतने आसान नज़र नही आ रहे है। 22 साल सत्ता में रहने के बाद प्रदेश के कई समुदाय भाजपा से नाराज़ चल रहे है। पटेल से लेकर दलितों तक में भाजपा के लिए काफ़ी नाराज़गी है। इसी नाराज़गी को कांग्रेस भुनाना चाहती है। फ़िलहाल कांग्रेस का यह प्रयास सफल भी होता दिख रहा है। सोमवार को टीवी न्यूज़ चैनल एबीपी के एक सर्वे में इस बात की पुष्टि भी होती दिख रही है।

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लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे के अनुसार गुजरात में भाजपा और कांग्रेस के बीच काँटे की टक्कर दिखाई दे रही है। अगर सर्वे की बात को माना जाए तो फ़िलहाल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनो को ही 43-43 फ़ीसदी मत प्रतिशत मिलते दिखाई दे रहे है। जबकि अभी तक के तमाम सर्वो में भाजपा को 49 फ़ीसदी मत प्रतिशत मिलते दिख रहे थे। मतलब साफ़ है की चुनाव नज़दीकि आते आते भाजपा की ज़मीन खिसकती जा रही है।

हालाँकि सर्वे के अनुसार मत प्रतिशत बराबर होने के बावजूद भाजपा सत्ता में वापसी कर सकती है। अगर सीटों को बात की जाए तो भाजपा को 95 सीटे तो वही कांग्रेस को 82 सीटें मिलने का अनुमान है। इस बारे में सर्वे करने वालों का कहना है की चूँकि आने वाले दिनो में गुजरात में मोदी की कई रैलियाँ प्रतावित है इसलिए दोनो पार्टियों के बीच 10 से ज़्यादा सीटों का अंतर रह सकता है। लेकिन फ़िलहाल यह सर्वे भाजपा की माथे पर चिंता की लकीरें लाने के लिए काफ़ी है।

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