20181109 180103
राष्ट्रीय लोकदल युवा के प्रदेश सचिव अन्सार सैफ़ी ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा है की जनहित मुद्दो को लेकर बीजेपी सरकार अपने अभी तक के कार्यकाल में विफल साबित हुई है इसलिये जनता का असल मुद्दो से ध्यान हटाने के लिये नाम बदलने की राजनीति कर रही है मुगलसराय , इलाहाबाद , फैज़ाबाद , आदि जगहों का नाम बदलने के बाद भी अभी और भी जगहो के नाम बदलने की मांग उठ रही है जिसका महज़ एक ही उद्देश्य है और वो है वोट बैंक की राजनीति ।
महँगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी , कानून व्यवस्था चौपट है ना महिलाये सुरक्षित और नाही छोटी छोटी मासूम बच्चिया बलात्कारियों को कानून का कोई खौफ नही । शिक्षा एवम स्वास्थ्य में बेहतरी का स्तर लगातार गिर रहा है किसानो की बदहाली को दूर करने के लिये भी कोई नीतिया नही है सरकार के पास किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे है ।
सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत दिये कोई काम नही होता भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है । युवा वर्ग लगातार बेरोज़गारी का दंश झेल रहा है रोज़गार के लिये एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश यहाँ तक की देश छोड़ने को भी मजबूर है । ये वो बुनियादी जनहित मुद्दे है जिसके लिये सरकार सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होती है लेकिन अफसोस इन सभी मुद्दों में जनता को किसी भी प्रकार की कोई राहत नही मिली है अभी तक ।
जिले, प्रदेश एवम देश को बेहतर बनाने की नीतिया बनाने के बजाये सरकार को केवल नाम बदलने में ही विकास नज़र आ रहा है । अरबो रुपया नाम बदलने के लिये सरकार के पास है लेकिन उस जिले की बेहतरी के लिये कोई कारगर नीति नही है ।
अच्छा तो ये होता के नाम बदलने पर जो अरबो रुपया खर्च किया जाता है वही अरबो रुपया अगर उस जिले की समस्याओं को दूर करने के लिये खर्च किया जाता तो जिले की पूरे प्रदेश एवम देश में एक अलग ही तस्वीर बनती लेकिन सरकार को इन बातों को सोचने एवम समझने का वक़्त नही है ।
एक तरफ बीजेपी दूसरी पार्टियो पर धर्म जातपात एवम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप प्रत्यारोप लगाती है वही दूसरी और केवल धार्मिक सोच के ही कारण नाम बदलने की राजनीति को परवान चढ़ाया जा रहा है इनका नाम बदलना भी वोट बैंक के लिये धार्मिक ध्रुवीकरण मात्र है जिसके जरिये ये अपने लिये वर्तमान एवम भविष्य की राजनीतिक सीमाओं को बढ़ाने का स्वप्न देख रहे है लेकिन असल चीज़ तो यही है के किसी सम्प्रदाय या उक्त क्षेत्र का विकास उसके ज़मीनी विकास की बदौलत होता है नाकि नाम बदलने से ।
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