51 साल बाद पहली बार बिहार विधानसभा में विधानसभा के अध्यक्ष का निर्वाचन वोटिंग के जरिये होने जा रहा है। जिसमे अब एक मत की भी अहम भूमिका होगी। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने यह कहकर कि ‘हम महागठबंधन में शामिल नहीं है।’ विपक्ष की परेशानी बढ़ा दी है।

न्यूज़18 के अनुसार, AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख़तरुल ईमान ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव सर्वसम्मति से हो। ईमान ने कहा कि हम ये कोशिश सदन में वोटिंग के आख़िरी-आख़िरी तक करेंगे। महागठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर उन्होने कहा, हम महागठबंधन में शामिल नहीं हैं तो उस बैठक में क्यों शामिल होते। बिहार में हम थर्ड फ़्रंट है।

एनडीए ने अपने स्पीकर पद के उम्मीदवार विजय सिन्हा का नाम घोषित किया जिसके बाद विपक्ष ने भी स्पीकर के उम्मीदवार के रूप में सीवान के विधायक अवध बिहारी चौधरी को उतारा। उन्होंने नामांकन पर्चा भी भर दिया है। सदन में शक्ति की बात करें तो NDA के पास 125 विधायक हैं जबकि महागठबंधन के पास 110 विधायक हैं।

इसी बीच BSP के विधायक जमा खान ने जो इशारा किया है वो भी NDA के लिए उत्साहवर्धक है। जमा खान ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष पद की एक गरिमा होती है, उसका सर्वसम्मति से चुनाव होना चाहिए। चुनाव हो रहा है ये ठीक नहीं है। वहीं लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के बारे में भी माना जा रहा है कि उनका झुकाव भाजपा के उम्मीदवार के तरफ़ ही होगा।

बता दें कि 1969 में स्पीकर पद का चुनाव हुआ था, धनिक लाल मंडल पक्ष से थे और सरदार हरिहर सिंह विपक्ष से थे। स्पीकर पक्ष ने जीता था। सरदार हरिहर सिंह बिहार सरकार के वर्तमान मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह के दादा थे। बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार कहते हैं कि ऐसी परिपाटी अमूमन नहीं होती है। हम आग्रह करते हैं कि विरोधी अपने उम्मीदवार को वापस ले लें।

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