नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) ने पश्चिम बंगाल में आधिकारिक संगठन न होने के बावजूद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

एआईएमआईएम के संयोजक ज़मीरुल हसन ने मुस्लिम मिरर को बताया, राज्य में एमआईएम के समर्थक हैं और यह जिला स्तर पर एक निकाय बनाने और वहां सदस्यता अभियान शुरू करने के बारे में है। हालांकि, AIMIM के पूर्व राजनेता अनवर पाशा सोमवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए।

इस बारे में ज़मीरुल हसन ने कहा, पाशा को एक साल पहले एआईएमआईएम से निकाला गया था क्योंकि पार्टी नेतृत्व को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें मिली थीं। जब हसन से पूछा गया कि क्या पाशा को कोई टर्मिनेशन लेटर जारी किया गया है?

उन्होने कहा, “पश्चिम बंगाल में कोई भी AIMIM का आधिकारिक सदस्य नहीं है। जब पार्टी यहां लॉन्च नहीं हुई है तो आप आधिकारिक पत्र कैसे मांग सकते हैं? ” बता दें कि पाशा पश्चिम बंगाल में “एआईएमआईएम का चेहरा” थे। जो AIMIM के कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को कोलकाता में TMC में शामिल हो गए।

एआईएमआईएम के पिछले निर्णयों का उल्लेख करते हुए, पाशा ने सवाल उठाया कि “आप [एआईएमआईएम] पश्चिम बंगाल के बारे में इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहे हैं जब आप देख रहे हैं कि स्थिति प्रतिकूल है?”

उन्होने कहा, “आप” AIMIM] पूरी तरह से जानते हैं कि बंगाल की चुनावी राजनीति में आपकी एंट्री क्या नुकसान पहुंचा सकती है। भाजपा किसी भी कीमत पर बंगाल का किला जीतना चाहती है ताकि वह भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त कर सके। ”

वहीं एआईएमआईएम के प्रवक्ता असीम वकार का कहना है कि टीएमसी को एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन वह तैयार नहीं है। वकार के दावे के अनुरूप, हसन ने कहा, “हम कह रहे हैं कि हमें 94 सीटों पर लड़ने दें और आप [टीएमसी] शेष 200 सीटों पर चुनाव लड़ें।”

पाशा ने कहा, “क्या आपका [AIMIM] पश्चिम बंगाल में एक निकाय हैं? यदि आपके पास नहीं है तो आप किस आधार पर चुनाव लड़ना चाहते हैं … विधानसभा चुनाव छोड़ दें, AIMIM बंगाल में पार्षद की सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। “

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