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आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत द्वारा बुधवार को ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के सबंध में टिप्पणी करने को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है.

इस मामले में AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सेना प्रमुख के बयान पर पलटवार करते हुए कहा- पार्टी बढ़ रही है तो सेना प्रमुख को चिंता क्यों हो रही है? बदरुद्दीन ने कहा कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने एक राजनीतिक बयान दिया है, जो चौंकाने वाला है. सेना प्रमुख को चिंता क्यों है कि बीजेपी की तुलना में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित एक राजनीतिक पार्टी तेजी से बढ़ रही है?

उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियों के गलत रवैए की वजह से AIUDF और AAP जैसी वैकल्पिक पार्टियां तेजी से आगे बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान देकर सेना प्रमुख क्या खुद को राजनीति में शामिल नहीं कर रहे हैं? जो कि संविधान के खिलाफ है.

ध्यान रहे एक सेमीनार में आर्मी चीफ ने कहा कि ”एक पार्टी है एआईयूडीएफ, अगर आप देखें तो बीजेपी का इतने वर्षों में जितना विस्तार हुआ, उसके मुकाबले एआईयूडीएफ का तेजी से विस्तार हुआ. जब हम जनसंघ की बात करते हैं और बात करते हैं इसे दो सांसदों से वे कहां पहुंच गए तो हमें यह भी देखना चाहिए कि एआईयूडीएफ असम में तेजी आगे बढ़ रही है. आखिरकार हमें यह देखना होगा कि असम कैसा राज्य होगा.”

इस मामले में इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है. ओवैसी ने कहा कि  सेना प्रमुख को राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, किसी राजनीतिक पार्टी के उदय पर बयान देना उनका काम नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है. सेना हमेशा एक निर्वाचित नेतृत्व के तहत काम करती है.

इस बीच सेना ने आर्मी चीफ के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई राजनीतिक या धार्मिक बात नहीं. आर्मी चीफ के इस बयान पर सेना की तरफ से कहा गया कि उनकी बातचीत में कई राजनीतिक या धार्मिक टिप्पणी नहीं की गई है.

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