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बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया है। उनका ये इस्तीफा दो दिन पहले हनुमान जी को मनुवादियों का गुलाम बताने के बाद आया है।

दरअसल, फूले ने कहा था कि ‘हनुमान दलित थे और मनुवादियों के गुलाम थे। लोग कहते है कि भगवान राम है और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था। बीजेपी सांसद ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया?

उन्होने ये भी कहा था कि उनको तो इंसान बनाना चाहिए था लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया। उनको पूंछ लगा दी गई, उनके मुंह पर कालिख पोत दी गई। चूंकि वह दलित थे इसलिये उस समय भी उनका अपमान किया गया।

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इस्तीफा देने के साथ ही बाबरी मस्जिद की शहादत की 26वी बरसी पर उन्होने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि 1992 में मुस्लिम, दलित व पिछड़े लोगों की भावनाओं को आहत किया गया। भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए मनुवादी तरीके से बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया।

दलित नेता ने कहा, विहीप, आरएसएस व भाजपा के साथ मिलकर 1992 जैसी स्थिति को पैदा कर विभाभन की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है। इसलिए मैं अत्यंत आहत होकर भाजपा से इस्तीफा देती हूं। आज से मेरा भाजपा से कोई लेना देना नहीं है।

दलित सांसद होने के कारण मेरी बातों को अनसुना किया गया और मेरी हमेशा उपेक्षा की गई। संविधान को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। और पिछड़ा का आरक्षण बड़ी बारीकी से समाप्त किया जा रहा है। सावित्री ने प्रण लिया और कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूँगी घर वापस नहीं जाऊंगी। मैं संविधान को पूरी तरह से लागू करूंगी। जब तक कार्यकाल है मैं सांसद रहूँगी।

उन्होंने 23 दिसम्बर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में महारैली करने का भी ऐलान किया और कहा कि महारैली में देश भर से दलित समाज के लोग होंगे।

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