रविवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप के धर्मसभा को लेकर उपजे हालात की आजम खान ने संयुक्त राष्ट्र संघ से निगरानी करने की मांग की है।

आजम खां ने कहा कि एक बार फिर अयोध्या में जिस तरह का माहौल बन रहा है। ऐसे में एक बार फिर हमारी यूएनओ से अपील है इन हालात पर वो नजर रखे और कहीं ऐसा न हो कि छह दिसम्बर 92 में जब राम-जानकी रथ चला था, उस जैसा माहौल देश में न बनें।

उन्होंने कहा कि इस समय के संग्राम, महासंग्राम, संघर्ष, टकराव में मुसलमान कहीं नहीं है, क्योंकि मुसलमान अपने आप से अपनी व्यवस्था से देश के लोकतंत्र से बहुत मायूस है। इस वक्त भारत के मुसलमान को कोई रास्ता भी सुझाई नहीं देता। बहुत नाउम्मीदी और मायूसी के दौर से भारत का मुसलमान गुजर रहा है। बहुत अपमानजनक और जुल्म से भरी जिन्दगी यहां मुसलमान गुजार रहें हैं।

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इस दौरान  राम मंदिर निर्माण की बात करने वालों के खिलाफ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘जो लाखों लोग इन्होंने जुटाए हैं, वे सबसे बहादुर लोग हैं। 6 दिसंबर 1992 को यही बहादुर अकेली पुरानी इमारत को गिरा दिए थे, वह बहुत बहादुरी का काम हुआ था।”

आजम ने आगे कहा कि तब एक तरफा बहादुरी दूसरी फिर कर लें। दोनों बहादुरी इतिहास में लिखी जायेंगी। फौज पहले भी लगी थी। इसमें फौज पीएसी से मतलब नहीं होता। आदेश और हाकिम की नीयत से मतलब होता है। हाकिम खामोश तमाशाई बना हुआ है। बहुत बहादुरी की बात है दूसरा शौर्य दिवस मनायेंगे। चुनाव है न इसी से वोट मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि चार पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगारी से तंग आकर ट्रेन के आगे कूद गए, जिनमें से तीन की मौत हो गई। एक जिन्दगी मौत की लड़ाई लड़ रहा है। कोई और देश होता तो लोग सड़कों से वापिस नहीं जाते, जबतक उतना ही खून सत्ता में बैठे लोगों का नहीं बह जाता। हमारे यहां तो इतिहास में सबसे बड़ा कारनामा छह दिसम्बर को हुआ। बाकी तो बाहर से हुक्मरां आते रहे और हम पर हुकूमते करते रहे। अब हो सकता है दूसरा बड़ा बहादुरी का काम हो। उन्होंने कहा कि आज जो कुछ हो रहा है यह कोर्ट को खुली चुनौती है।

उन्होंने कहा कि यह सब इस लिए हो रहा है, क्योंकि पांच साल कुछ तो किया नहीं है, इसीलिए पांच दिन में भूख से मरते बिलखते लोगों को कुछ तो दिखाना है।

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