गुरुवार को नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स (एनएसजी) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने कहा है कि कुरान में भी ‘फसादियों’ को मिटाने की इजाजत दी गई हैं. जिससे पूरे समुदाय की हिफाजत होती है.

उन्होंने कहा, ‘…जब हम आतंकवाद का खात्मा करते हैं तो इंसानी अधिकारों की रक्षा करते हैं. यह बहस लगातार चलती ही रहेगी कि जो लोग आतंकवाद का खात्मा चाहते हैं, वे एक तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं. ऐसा उन परिस्थितियों में है, जब मानवाधिकारों को सबसे बड़ा खतरा भी आतंकवाद से ही है.’

अकबर ने कहा कि मुस्लिमों के कुछ धड़ों में कट्टरता के प्रसार की वजह से वास्तविकता और इस्लाम के सही संदेश के धूमिल पड़ने का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में भारत सरकार कट्टरता से निपटने के लिए एक इंटरनैशनल सेमिनार रखने के बारे में विचार कर रही है.

उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे इस्लामिक विश्वास के मुताबिक, धर्म में राजनीतिक मतभेद तो काफी पहले पैगंबर मोहम्मद की मृत्यु के बाद ही उभरकर सामने आ गया और इसकी वजह से ही शियाओं और सुन्नियों के बीच संघर्ष है. अगर धर्म ही राष्ट्रवाद का आधार होता तो 22 अरब देश क्यों बनते?’

अकबर के मुताबिक, भारत में अधिकांश मुसलमान कट्टरता का शिकार नहीं हुए, ऐसे में भारत सरकार आतंकवाद और कट्टरता के प्रसार को रोकने के लिए तात्कालिक कदम उठाने की अहमियत को समझती है.कबर के मुताबिक, कट्टरता से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की पहल के अलावा विचारों के स्तर पर भी काम करना होगा.


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