बहराइच | उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावो के चरण मुकम्मल हो चुके है. अब केवल तीन चरण बाकी है. लेकिन जैसे जैसे मतदान आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे उत्तर प्रदेश में विकास के मुद्दे भी कही खोते नजर आ रहे है. अभी तीसरे चरण में ‘कब्रिस्तान-शमशान’ मुद्दा था तो चौथा चरण आते आते यह ‘गुजरात के गधे’ की और चला गया. लगता है की सातो चरण पुरे होते होते सभी मर्यादाये अपनी सीमा लाँघ चुकी होगी और प्रदेश की जनता एक बार फिर अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही होगी.

कुछ दिन पहले अखिलेश यादव ने बहराइच की रैली में अमिताभ बच्चन से आग्रह किया था की वो गुजरात के गधो का प्रचार न करे. अब अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बहराइच में ही जवाब दिया है. उन्होने कहा की अखिलेश गुजरात के गधो से इतनी नफरत करते है. लेकिन यह वही गुजरात है जिसने महात्मा गाँधी, सरदार पटेल और स्वामी दयानद जैसे लोगो को जन्म दिया.

मोदी ने आगे कहा की भगवान् कृष्ण अयोध्या से गुजरात जाकर वही के हो गए. आपको इतनी नफरत शोभा नही देती. मोदी ने गधे से प्रेरणा लेने की बात करते हुए कहा की अगर आपका दिल और दिमाग साफ़ है तो गधे से भी प्रेरणा ली जा सकती है. गधा अपने मालिक का वफादार होता है. भूखा होता है, थका होता है, बीमार होता है लेकिन मालिक का काम करता है.

मोदी ने खुद गधे से प्रेरणा लेने की बात करते हुए कहा की मैं भूखा हूँ, थका हूँ , बीमार हूँ लेकिन अपनी मालिक, 125 करोड़ जनता का काम करता हूँ. लेकिन गधे पर चीनी डालो या चुना वो बिना भेदभाव करके उनको ढोता है. लेकिन अखिलेश जी पशुओ में भी भेदभाव करते है. युपीए शासनकाल में गुजरात के गधो पर जारी डाक टिकेट का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा की 2013 में यूपीए सरकार ने इन गधो पर डाक टिकेट जारी किया था, अब आपको समझ आ गया होगा की ये गधे कितने महतवपूर्ण है.

अखिलेश ने भी मोदी को जवाब देते हुए कहा की जब से मैंने गुजरात के गधो का जिक्र किया है तब से मोदी जी इतने भावुक हो गए की वो गधे-गधे की रट लगाए हुए है. मुझे लगता है की बीजेपी वाले बोखलाहट में खिसिया गए है. अखिलेश ने अमित शाह के कसाब वाले बयान पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा की हमें तो क से कबूतर सिखाया गया था, ये बीजेपी वाले देखो क से क्या सिखा रहे है?


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