Thursday, January 27, 2022

ओवैसी बोले – कोर्ट में काला बंदर आया तो जज के लिए भगवान ने कुबूल कर लिया फैसला….

- Advertisement -

नई दिल्ली. राममंदिर-बाबरी विवाद को लेकर पूर्व गृह सचिव माधव गोडबोले ने रविवार को कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद की सुरक्षा के लिए हमने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव प्रेसिडेंट रूल पर अपनी शक्तियों को लेकर संशय में थे।

गोडबोले ने कहा,  अगर राजीव गांधी कदम उठाते तो इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता था, क्योंकि उस वक्त दोनों पक्षों की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं थी। समझौते की संभावना थी और समाधान को स्वीकार किया जा सकता था। राजीव बाबरी मस्जिद के ताले खोलने की सीमा तक गए और वहां मंदिर की आधारशिला रखी गई। यह काम तब हुआ, जब राजीव प्रधानमंत्री थे। मैं इसीलिए उन्हें इस आंदोलन का दूसरा कारसेवक कहता हूं, पहला वह डीएम है, जिसने इस सबको मंजूरी दी थी।

इस पूरे मामले में अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि गोडबोले ने जो कहा है, वह सच है। बाबरी मस्जिद के ताले राजीव गांधी ने ही खुलवाए थे। इस बात का दावा उस जज ने भी अपनी किताब में किया है, जिन्होंने इस केस में फैसला किया। जज ने दावा किया है कि उनके कोर्ट में तब एक काला बंदर आकर बैठ गया था, जबकि फैसला दिए जाने के बाद वह दोबारा उनके घर आया, जिससे जज ने समझा कि उनका फैसला भगवान ने कबूल लिया है।

सोमवार को पत्रकार वार्ता के दौरान ओवैसी से गोडबोले के बयान पर जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल सच है। राजीव गांधी ने ही तब बाबरी के ताले खुलवाए। ताले खुलाने का ताल्लुक शाह बानो से नहीं है। यह पहले से चल रहा था। जस्टिस पांडे ने फैसले के पीछे कारण बताया था। उन्होंने अपनी किताब में दावा किया था कि उन्होंने ताले खोलने का फैसला इसलिए दिया था, क्योंकि उनके कोर्ट में एक काला बंदर आकर बैठ गया था। लोग उसे बादाम और अखरोट खिला रहे थे, पर वह नहीं खा रहा था। जब उन्होंने फैसला दिया, जिसके बाद वह काला बंदर दोबारा उनके यहां आकर बैठ गया था। उन्होंने इसी से समझा कि प्रभु ने उनका फैसला कबूल कर लिया।”

बकौल ओवैसी, “हम इसलिए कह रहे हैं कि इस मामले में 1949 से ताले खुलाने तक, इसमें इंसाफ नहीं हुआ है। गोडबोले ने जो कहा, वह बिल्कुल सही है। जिसके पास चाभी थी, उसे बुलाया भी नहीं गया था। बाद में राजीव गांधी भी वहीं से चुनावी मुहिम का आगाज करते हैं। ये ऐतिहासिक तथ्य हैं और इनसे कोई इन्कार नहीं कर सकता है। गोडबोले जी ने जो कहा है, वह बिल्कुल सही और सच है।”

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles