Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

ओवैसी की इमरान को दो टूक – लश्कर-ए-शैतान और जैश-ए-शैतान पर लगाए लगाम

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हैदराबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर से ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को दो टूक शब्दों में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयब्बा पर लगाम लगाने की बात कही।

दरअसल, हाल ही में इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में भारत को परमाणु बम की धमकी देते हुए, टीपू सुल्तान को अपना हीरो बताया था। ओवैसी ने उनकी इस बात का जवाब भी दिया और बताया कि टीपू की लड़ाई किसी धर्म विशेष के साथ नहीं थी।

हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में अपनी संसद में टीपू सुल्तान की बात की। टीपू सुल्तान हिंदुओं के दुश्मन नहीं थे, वो उनकी सल्तनत के जो दुश्मन थे, फिर चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान हो, उनके दुश्मन थे.. जरा ये भी पढ़ लो। आप वहां अपनी असेंबली में बैठकर टीपू सुल्तान और बहादुर शाह जफर की बात करते हो। एटम बम… फलां बम… यहां नहीं है क्या… हमारे यहां भी हैं। मगर ये क्या बात है, आप पहले जरा जैश-ए-शैतान और लश्कर-ए-शैतान को खत्म करो।’

इस सभा में ओवैसी ने भाजपा के ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘मेरे मुसलमान होने पर शायद तुम्हें शक होगा कि ये वफादार है या एंटी-नेशनल है, मगर सुनो मेरी एक बात को, अगर बीजेपी ये कह रही है कि मेरा बूथ सबसे मजबूत, तो मैं कह रहा हूं कि ‘मेरी सरहद मजबूत तो मेरा देश मजबूत।’

पाक संसद में ये बोले थे इमरान खान

– इमरान खान ने 28 फरवरी को पाकिस्तानी संसद में कहा था, ‘जब हम पीछे देखते हैं तो हमें दो बादशाह मिलते हैं, एक बहादुर शाह जफर और दूसरा टीपू सुल्तान। बहादुर शाह जफर को जब गुलामी और मौत में से किसी एक को चुनना था, तो उन्होंने गुलामी को चुना था और बाकी जिंदगी गुलामी में निकाली थी।’
– ‘टीपू सुल्तान के सामने भी एक वक्त आया जब आपको चुनना था कि आप हाथ खड़े करके अंग्रेजों की गुलामी करेंगे या आप एक आजाद इंसान की तरह आखिरी दम तक लड़ेंगे। इस मुल्क का हीरो टीपू सुल्तान है। जिन्होंने आखिरी सांस तक आजादी की लड़ाई लड़ी।’
– आगे इमरान ने कहा था, ‘दो मुल्क जिनके पास बराबरी के हथियार हैं उन्हें लड़ाई के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। आप अगर किसी कौम (देश) को इस लेवल तक पुश कर देंगे तो एक गैरतमंद कौम आजादी के लिए लड़ेगी वो गुलामी को स्वीकार नहीं करेगी।’

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