Thursday, August 5, 2021

 

 

 

मस्जिदों में नमाज को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने की मुस्लिमों से बड़ी अपील

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आज से देशभर में धार्मिक स्थल खोले जा रहे है। ऐसे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिदों में नमाज को लेकर मुस्लिमों से बड़ी अपील की।

ओवैसी ने कहा कि वो नमाज़ियों अपील करते हैं कि चूंकि यह वायरस कहीं जा नही रहा और सबको इसके साथ जीने की आदत डालनी है, ऐसे में मस्जिद में नमाज को लेकर सबको कुछ नई आदतें डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्गों और किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को अभी घर में ही रहना चाहिए। उन्हें भीड़-भाड़ वाली जगह पर इकट्ठा नहीं होना चाहिए। मस्जिद में नमाज़ पढ़ते वक्त दो नमाज़ियों के बीच में वाजिब दूरी होनी चाहिए। लोगों को घर से ही वज़ू करके जाना चाहिए और अपना जानमाज़ (चटाई जिस पर बैठकर नमाज़ पढ़ी जाती है) घर से लेकर जाइए।

ओवैसी ने मस्जिद कमेटियों से अपील की कि वो मस्जिदों में ऐसी व्यवस्था बनाए रखें कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो।  लोगों को खतरा न हो। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में वज़ू करने और शौचालय की सुविधा को बंद रखा जाना चाहिए।

इससे पहले उन्होने धार्मिक स्थल खोले जाने के चलते नए नियम लागू करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था, ‘मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री, तेलंगाना डीजीपी और मुख्य सचिव से आग्रह करता हूं कि वो सभी धार्मिक समुदायों के बड़े लोगों के साथ मीटिंग बुलाएं ताकि राज्य के हर धार्मिक स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े नए नियम बनाए जा सकें।’

बता दें कि महाराष्ट्र-झारखंड-राजस्थान और जम्मू-कश्मीर को छोडकर पुरे देश में शर्तों के साथ धार्मिक स्थल खोल दिये गए है। हर राज्य ने अपनी-अपनी गाइडलाइन जारी की है।

Previous articleकोरोना के खौफ ने सभी को डरा के रखा हुआ है। ऐसे में लोग अपने परिजनो का अंतिम संस्कार करने से भी हिचक रहे है। इसी बीच गिरिडीह के मुस्लिम युवकों ने गंगा-जमुनी तहजीब का एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। दरअसल, जब 72 वृर्षीय वृद्धा लखिया देवी की मौ’त होने के बाद उनके समाज के लोगों ने कोरोना महामारी से भयभीत होकर अर्थी को कंधा देने से परहेज करते नजर आए, तब बरवाडीह पहाड़ीडीह के मुस्लिम समुदाय के करीब 40-50 युवक आगे आए। और  वृद्धा लखिया देवी के बेटे जागेशवर तूरी और पोते समेत परिवार के कुछ सदस्य से साथ मुस्लिम नौजवानों ने अर्थी को लेकर आठ किमी दूर स्थित भोरणडीहा मुक्तिधाम पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाया। वृद्धा हिन्दु महिला को पार्थिव शरीर को कंधा देने के लिए बरवाडीह के मो. श्मेसर आलम, मो. राजन. मो. राज. मो. बिलाल उर्फ गुड्डन. मो. ताहिद और सलामत समेत कई युवक शामिल थे। जो पूरे हिंदु रीति-रिवाज के अनुसार सजे अर्थी को कंधा देने पहुंचे और वृद्धा के पार्थिव शरीर को दोपहर कड़ी धूप में कंधा देते हुए भोरणडीहा मुक्तिधाम पहुंचाया। जानकारी के अनुसार, 72 वर्षीय वृद्धा लखिया देवी शुगर की बीमारी से कई दिनों से पीड़ित थी। साथ ही वृद्धा लकवा की बीमारी से भी ग्रसित थी। परिजनों ने इलाज के लिए रांची के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ता जा रहा था। लिहाजा, परिजन वृद्धा को गिरिडीह वापस ले आएं थे। वहीं शनिवार को वृद्धा की मौ’त हो गई। इस दौरान जानकारी मिलने के बाद मृतिका के सगे-संबधी तो श’व का अंतिम दर्शन के लिए उसके घर पहुंचे थे, लेकिन कोरोना से भयभीत होकर सभी दूर थे। गिरिडीह के मुसमलानों ने वृद्ध हिंदू महिला के पार्थिव शरीर को कंधा देकर हिन्दु-मस्लिम एकता , भाईचारे , प्रेम और करूणा का एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।
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