तेलंगाना में एक चुनवी रैली को संबोधित करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने अल्‍पसंख्‍यकों के लिए आरक्षण देने के प्रस्‍ताव का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा तेलंगाना सरकार को अल्पसंख्यकों के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की इजाजत नहीं देगी।

टीआरएस के कदम को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए भाजपा प्रमुख ने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने कुल आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा तय कर दी है। उन्होंने टीआरएस से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि उन्होंने किस का आरक्षण कम कर अल्पसंख्यकों को आरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।

शाह ने कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के आरक्षण की रक्षा के लिए एक चट्टान के रूप में खड़ी होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दावा किया कि केवल उनकी पार्टी तेलंगाना में वह सरकार प्रदान कर सकती है जो मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) और उसके नेता असदुद्दीन ओवैसी पर निर्भर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सात दिसंबर के चुनाव राज्य का भविष्य तय करेंगे।

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अमित शाह ने कहा कि टीआरएस प्रमुख केसीआर ने अपने बेटे और बेटी को आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने का निर्णय लेकर अतिरिक्त चुनाव खर्च का बोझ डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केसीआर मोदी के प्रभाव के कारण विधानसभा चुनाव 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ कराने से डरते थे।

उन्होंने कहा कि जब देश में यूपीए की सरकार थी तो उसने तेलंगाना को कुछ नहीं दिया। कांग्रेस ने तेलंगाना को अन्याय के अलावा कुछ नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस ने तेलंगाना को सिर्फ 16596 हजार करोड़ दिए थे। लेकिन जब भाजपा की सरकार आई तो 14वें वित्त आयोग में भाजपा ने तेलंगाना को 16596 से बढ़ाकर 1 लाख 15605 करोड़ रुपए देने का काम किया।

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