Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

अखिलेश यादव को इलाहाबाद जाने से रोका गया, मायावती ने कहा – बीजेपी सरकार की तानाशाही

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लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्मयंत्री अखिलेश यादव को मंगलवार को अमौसी एयरपोर्ट पर प्रयागराज जाने से रोक दिया गया। अखिलेश प्राइवेट प्लेन से एक छात्र नेता के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे थे। उनका कुंभ जाने का भी कार्यक्रम था।

इस दौरान अखिलेश यादव अधिकारियों पर जमकर बरसे और उन्होंने अधिकारियों से रोके जाने को लेकर कागज दिखाने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि मुझे हाथ मत लगाना। आप मुझे रोकने आए हैं तो आपके पास मुझे रोके जाने को लेकर कागज भी होगा। सरकार कागज से चलती है।

इस घटना की बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कड़ी निंदा की। मायावती ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया और सरकार की तानाशाही बताया। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, ‘मैं पहले ही अखिलेश यादव से बात कर चुकी हूं। हम सभी तथाकथित बीजेपी नेताओं के अहंकारी रवैये की निंदा करते हैं, जिन्होंने छात्रों को संबोधित करने की अखिलेश को इजाजत नहीं दी। यही नहीं, जिग्नेश मेवाणी को भी अनुमति नहीं दी गई थी। हमारे देश में लोकतंत्र कहां है? और वे सभी को इसका पाठ पढ़ा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘लखनऊ में अधिकारियों द्वारा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ किया गया व्यवहार निंदनीय है। राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बीजेपी की असहिष्णुता का यह एक और उदाहरण है। वाकई लोकतंत्र खतरे में है।’

लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के प्रमुख शरद यादव ने कहा, ‘छात्रों के एक कार्यक्रम में शामिल होने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जा रहे अखिलेश यादव को यूपी की बीजेपी सरकार द्वारा रोकना एक अलोकतांत्रिक कृत्य है। यह दर्शाता है कि वे विपक्ष के नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता से घबराए हुए हैं। यह अघोषित आपातकाल है।’

इस बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रयागराज में कुंभ चल रहा है। अभी तक वहां कई कार्यक्रम सफलतापूर्वक हुए हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने आग्रह किया था अखिलेश यादव के प्रयागराज पहुंचने से छात्र संगठनों के बीच हिंसा भड़क सकती है, जिससे वहां कानून-व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा हो सकती है। इसी आधार पर सरकार ने अखिलेश को रोकने का फैसला किया। समाजवादी पार्टी को ऐसी अराजकतावादी गतिविधियों से रोका जाना चाहिए।”

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