समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव सैफई में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होने किसान आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होने कहा कि किसानों का दुःख और तकलीफ को नहीं समझने वाला शख्स योगी नहीं हो सकता।

अखिलेश यादव ने कहा कि, “भगवान श्रीकृष्ण ने योगी की परिभाषा दी है। उस परिभाषा को और गुरु नानक जी के वचनों को पढ़ा जाए तो इतना ही समझ में आता है जो दूसरों का दुख अपना दुख समझे, वही योगी होता है। तो बताओ क्या आपके मुख्यमंत्री जी योगी हैं? क्या वह आपका, हमारा, किसानों और नौजवानों का दुख और तकलीफ समझ सकते हैं? वो योगी नहीं हैं।”

उन्होने कहा, “बीजेपी हमारे देश की पहचान को खत्म कर देना चाहती है। हमारे मुल्क की सबसे बड़ी पहचान यहां की गंगा-जमुनी तहजीब है। हम एक-दूसरे का हमेशा सम्मान करते आए हैं। एक-दूसरे के लिए त्याग करते आए हैं। बीजेपी इसी तहजीब को खत्म करना चाहती है। इसीलिए जानबूझकर ये सरकार हमारे-आपके काम की बात नहीं करती। वो धर्म और जाति के नाम पर सिर्फ नफरत फैलाती है।”

अखिलेश ने कहा कि अगर किसान आतंकवादी और खालिस्तानी हैं तो भाजपा वाले किसानों के द्वारा उपजाया हुआ अनाज क्यों खा रहे है? सरकार दावा कर रही है कि किसानों को एमएसपी का लाभ देते हुए उनका धान 1868 रुपये प्रति कुंतल के हिसाव से सरकार ने खरीदा है जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश में किसानों को अपना धान नौ सौ, एक हजार और ग्यारह सौ रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से बेचना पड़ा है।

उन्होने ट्वीट किया, बीजेपी सरकार ने जिस प्रकार किसानों को निरंतर उपेक्षित, अपमानित और आरोपित किया है, उसने किसानों के रोष को आक्रोश में बदलने में निर्णायक भूमिका निभायी है। अब जो हालात बने हैं, उनके लिए बीजेपी ही कसूरवार है। बीजेपी अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए कृषि-क़ानून तुरंत रद्द करे।