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आगरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजमहल के दौरे के साथ ही एक बार फिर से इस हसीन प्यार की निशानी को लेकर सियासत शुरू हो चुकी है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे विश्व भर में हो रही बदनामी से बचने का एक स्टंट करार दिया.

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में हो रही बदनामी से बचने के लिए आज केंद्र सरकार के दबाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मजबूरन विरासत स्थल जाना पड़ा. उन्होंने कहा, भाजपा के लोगों ने ताजमहल को शिव का मंदिर बता दिया. किसी ने उसे भारतीय संस्कृति पर धब्बा कहा. मगर देखिए समय कैसे बदलता है, जब अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई तो केंद्र सरकार के दबाव में मुख्यमंत्री योगी आज ताजमहल पहुंच गए.

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अखिलेश ने योगी द्वारा ताज में चलाए गए स्वच्छता अभियान पर भी तंज कसा और कहा, जो लोग ताजमहल को देख कर क्या- क्या कहते थे. जो अपना कल्चर नहीं मानते थे, जिसे यह हेरिटेज नहीं मानते थे. वह भगवान राम की वजह से वहां सफाई कर रहे हैं. हम राम का शुक्र अदा करते हैं, यह उनकी वजह से हुआ है. कूड़े की सफाई सबसे अच्छा बीजेपी करती है। अब जल्द समय आ रहा है. हम जानते हैं, कूड़ा कहां फेंकना है. ताजमहल के आसपास जितना काम सपा सरकार ने किया उतना काम किसी ने नहीं किया.

सपा प्रमुख ने कहा, ताजमहल परिसर में कुछ लोगों ने भगवा पहनकर पूजा की. यह लोग देश से पर्यटन को खत्म करना चाहते हैं, मैं चुनौती देता हूं कि भाजपा और उसके लोग ताजमहल को दुनिया की धरोहर इमारतों की सूची से हटवाकर दिखाएं.

पूर्व सीएम ने एक ट्वीट भी किया. जिसमे उन्होंने ने लिखा है कि ये है जमुना किनारे खड़े ताज का कहना, ये है प्यार का तीर्थ, यहां भी आते रहना.

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