नई दिल्ली | अखिलेश यादव और मुलायम सिंह के बीच , समाजवादी पार्टी के सिंबल ‘साइकिल’ को लेकर पिछले 13 दिनों से चल रही जंग का आज अंत हो गया. चुनाव आयोग ने अखिलेश के पक्ष में फैसला सुनते हुए मुलायम सिंह को रेस से बाहर कर दिया. उन्होंने अखिलेश को ‘साइकिल’ दे दी और मुलायम सिंह को पैदल चलने पर मजबूर कर दिया. चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है की आखिर किस आधार पर चुनाव आयोग ने अखिलेश के पक्ष में फैसला दिया?

चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह बात सामने आई है की भले ही अखिलेश और मुलायम के बीच ‘साइकिल’ की जंग चल रही हो लेकिन असल में मुलायम सिंह यह जंग लड़ ही नही रहे थे. चुनाव आयोग में केवल अखिलेश ‘साइकिल’ के लिए लड़ रहे थे. अखिलेश ने करीब 4 हजार पन्नो का हलफनामा देकर चुनाव आयोग के सामने अपनी दावेदारी रखी थी जबकि मुलायम ने एक भी हलफनामा चुनाव आयोग में दाखिल नही किया.

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मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह से कई बार हलफनामा देने की बात कही लेकिन उन्होंने एक बार भी अपना हलफनामा नही दिया. मुलायम सिंह चुनाव आयोग के सामने यही कहते रहे की उनकी पार्टी में कोई विवाद नही है , जो छोटा मोटा विवाद है उसे हम मिल बैठकर सुलझा लेंगे. यही बात मुलायम के विरुद्ध गयी.

उधर अखिलेश ने अपने हलफनामे में 228 में से 205 विधायको का समर्थन होने की बात कही. इसके अलावा 68 में से 56 विधान पार्षदों , 24 में से 15 सांसदों, 46 में से 28 राष्ट्रिय कार्यकारिणी सदस्यों और 5731 में से करीब 4400 प्रतिनिधियों ने अखिलेश के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया. उधर पार्टी का हाईकमान बनते ही अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से आशीर्वाद लेने पहुंचे. वही रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग को धन्यवाद देते हुए कहा की अब अखिलेश एक बार फिर सूबे के मुख्यमंत्री बनेगे.

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