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चंडीगढ़ | मोदी सरकार के नोट बंदी के फैसले के बाद पूरा विपक्ष उनके विरोध में खड़ा हो गया. विपक्षी पार्टियों ने मिलकर मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया. संसद से लेकर सड़क तक, विपक्ष ने इस फैसले का विरोध किया. हालांकि एनडीए में शिवसेना को छोड़कर सभी घटक दलों ने इस कदम का स्वागत किया. लेकिन अब लगता है की बाकी दलों का भी सब्र टूट रहा है. खासकर उन राज्यों में जहाँ पर अभी चुनाव होने वाले है.

बीजेपी का मानना था की नोट बंदी के फैसले का उनको उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव में काफी फायदा होगा. लेकिन पुरे देश में हो रही कैश की किल्लत से बीजेपी के माथे पर बल पड़ने शुरू हो गये है. बीजेपी के अलावा उनके सहयोगी दल अकाली दल ने मोदी सरकार से हालात जल्द सुधारने की मांग की है. अकाली दल ने नोट बंदी के फैसले को ही गलत ठहराते हुए कहा की इससे पंजाब के गाँव में काफी दिकत्तो का सामना करना पड़ रहा है.

पंजाब की अकाली सरकार के दो मंत्रियो ने इकोनॉमिक्स टाइम्स से बात करते हुए कहा की उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बदल ने मोदी सरकार और बीजेपी से बात कर उनसे हालात जल्द सामान्य करने की मांग की है. पंजाब के ग्रामीण विकास मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने कहा की नोट बंदी के फैसले का पंजाब पर बड़ा ही विपरीत असर पड़ रहा है. खासकर ग्रामीण इलाको में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मलूका ने नोट बंदी के फैसले को ही गलत बताते हुए कहा की या तो सरकार को अधिकारियो ने गलत सलाह दी है या सरकार खुद भ्रमित रही है. सरकार ने नोट बंदी से पड़ने वाले असर का गलत आंकलन किया है. सरकार रोज बयान बदल रही है. एक महीने से सरकार केवल आश्वासन दे रही है की जल्द ही हालात ठीक हो जायेंगे. यह सुन सुनकर जनता के अन्दर गुस्सा बढ़ रहा है.

मलूका ने आगे कहा की अगर इस ठण्ड में लोगो को बैंकों की लाइन में और ज्यादा खड़ा होना पड़ा तो बीजेपी और अकाली दल को इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा. इसके अलावा विपक्ष लोगो को भ्रमित करने में भी कामयाब हो सकता है.


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