नई दिल्ली | मुलायम परिवार में चल रही खींचतान अब उस मुहाने आ चुकी है जहाँ से सुलह के सारे रास्ते बंद हो जाते है. अब यह तह है की अखिलेश और मुलायम अलग अलग चुनाव में आपनी ताल ठोकेंगे. अब यह देखना दिलचस्प होगा की सूबे का 19 फीसदी मुल्सिम किसके पाले में जाता है. हालाँकि अखिलेश खेमा दावा कर रहा है की पार्टी पर अब अखिलेश की पकड़ है और आगामी चुनावो में सूबे का मुस्लिम अखिलेश को ही वोट देगा.

इसी बीच खबर मिली है की बेटे को पठकनी देने के लिए मुलायम सिंह ने धोबी पछाड़ दावं चलने का फैसला किया है. मुलायम सिंह , मुस्लिम वोटो को अपनी और खींचने के लिए मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने पर विचार कर रहे है. इसके लिए उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद साथी अमर सिंह और भाई शिवपाल यादव से भी बात की है.

मुलायम सिंह चाहते है की उनकी तरफ से आजम खान को मुख्यमंत्री पद के रूप में आगे किया जाए. मालूम हो की बाप बेटे की बीच उपजे कलह को खत्म करने के लिए आजम खान ने मध्यस्ता करने की कोशिश की. और एक बार वो इस कोशिश में कामयाब भी हुए लेकिन रामगोपाल यादव के अधिवेशन बुलाने की वजह से सुलह की गाडी पटरी से उतर गयी.

अब आजम खान को लग गया है की पार्टी दो धडो में टूट चुकी है. फ़िलहाल आजम खान खुद असमंजस में है की वो किसका साथ दे. हालाँकि मुलायम सिंह ने आजम खान से इस मसले में मुलाकात की है. हालाँकि इस जिम्मेदारी के लिए आजम खान तैयार है या नही , इसकी जानकारी अभी नही मिली है. उधर पार्टी सिंबल ‘साइकिल’ पर अपना हक़ जताने के लिए मुलायम सिंह यादव चुनाव आयोग पहुंचे. उनके पीछे पीछे अखिलेश भी चुनाव आयोग पहुँचने वाले है.


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