गुरुवार को बंगलूरू में सीएए विरोधी रैली के दौरान दिए अपने बयान पर एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी समुदाय की भावनाओं को चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है।

उन्होने कहा, उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। हालांकि उनके बयान से कोई आहत हुआ है तो अपना बयान वापस लेते हैं। यह मुझे और मेरी पार्टी को बदनाम करने की साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई।

शनिवार को बांद्रा स्थित अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस में पठान ने कहा कि मेरा मतलब 15 करोड़ नाराज मुसलमानों से था। मैंने 100 करोड़ हिंदुओं को नहीं बल्कि 100 नेताओं पर टिप्पणी की थी। मैंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक और भाजपा के 100 नेताओं के खिलाफ बोला था। मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं और मैं देशविरोधी नहीं हूं।

दरअसल, 16 फरवरी को उत्तरी कर्नाटक के कलबुर्गी में सीएए के विरोध में आयोजित एक रैली में कहा था कि “ईंट का जवाब पत्थर से देना अब हम लोग सीख गए हैं, बस हमें एकजुट रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा था कि “वे हमें बताते हैं कि हमने अपनी महिलाओं को आगे कर रखा है और हम कंबल ढंककर बैठे हैं। अरे केवल शेरनी बाहर आई है और आप पहले से ही पसीना बहा रहे हैं। आप समझ सकते हैं कि अगर हम सब एक साथ आए तो क्या होगा। 15 करोड़ हैं, मगर 100 पर भारी हैं, याद रख लेना।”

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