महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर बीजेपी सरकार ने मुहर लगा दी है लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी मुस्लिम आरक्षण पर कोई फैसला नहीं लिया। ऐसे में अब आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की है।

उन्होंने मुस्लिमों को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर कोर्ट जाने का फैसला लिया है। ओवैसी ने शुक्रवार को एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने देश में मुस्लिमों के शिक्षा और रोजगार के स्तर का ब्योरा दिया है। इसी आधार पर ओवैसी ने मुस्लिमों को आरक्षण देने की मांग की है।

इस वीडियो के साथ ओवैसी ने लिखा है कि देश का मुसलमान भी आरक्षण का हकदार है, क्योंकि पीढ़ियों तक वे गरीबी में रहे हैं। ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, ‘रोजगार और शिक्षा में पिछड़े मुसलमानों को वंचित रखना अन्याय है। मैं लगातार कहता आया हूं कि मुस्लिम समुदाय में ऐसी पिछड़ी जातियां हैं जो पीढ़ियों से गरीबी में है। आरक्षण के जरिए इन्हें बाहर निकाला जा सकता है।’

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औवेसी की मांग का बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने समर्थन किया है. बता दें कि शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है। शिवसेना के विधायक सुनील प्रभु ने कहा कि पार्टी समाज के दबे कुचले लोगों को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि मैंने सदन में सवाल भी किया था कि मुस्लिमों के आरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ कर दिया था जितने भी दबे कुचले लोग हैं उनको आरक्षण दिया जाएगा, चाहे वो किसी भी पिछड़े समाज के हों, चाहे वो मुस्लिम ही क्यों न हों। उन्होंने कहा कि हम अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।

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