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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ रिश्तों को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने दावा किया कि शास्त्री को आरएसएस से नफरत नाही थी बल्कि वह अकसर प्रधानमंत्री रहते हुए भी गुरू गोलवलकर से विचार-विमर्श करते थे.

आरएसएस के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के लिए लिखे संपादकीय में आडवाणी ने कहा, ‘‘नेहरू से उलट, शास्त्री ने जनसंघ और आरएसएस को लेकर किसी तरह का वैमनस्य नहीं रखा. वह श्री गुरूजी को राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए बुलाया करते थे.’’

‘ऑर्गनाइजर’ से 1960 में बतौर सहायक संपादक जुड़ने वाले आडवाणी ने कहा कि वह इस साप्ताहिक के प्रतिनिधि के तौर पर शास्त्री से कई बार मिले. उन्होंने कहा, ‘‘हर मुलाकात में मुझ पर इस छोटे कद, लेकिन बड़े हृदय वाले प्रधानमंत्री की सकारात्मक छाप पड़ी.’’

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘धोती-कुर्ता एक नेता का पहनावा है. यह पत्रकारों को नहीं भाता. मेरे साथियों ने मुझसे यह बात कही थी. मैंने अपने साथियों की ओर से दी गई सलाह में कुछ उचित पाया और फिर से पतलून पहनने लगा.’’

आडवाणी ने लिखा कि 1977 में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहते हुए वह ख्वाजा अहमद अब्बास और पृथ्वी राज कपूर से मिले और वे दोनों यह जानकर हैरान रह गए कि ‘हमारे यहां एक मंत्री है जो पहले फिल्म आलोचक हुआ करता था.’

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