Wednesday, September 22, 2021

 

 

 

आम आदमी पार्टी ने कुमार पर लगाया ‘विश्वासघात’ करने का आरोप कहा, केजरीवाल सरकार गिराने की रची थी साज़िश

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नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी में सब कुछ सही नही चल रहा है। ख़ासकर राज्यसभा के उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी के अंदर लड़ाई अब सतह पर आ चुकी है। कुमार विश्वास को राज्यसभा उम्मीदवार नही बनाने के बाद आम आदमी पार्टी के उपर कई सवाल उठ रहे है। विपक्षी दलो का आरोप है की अरविंद केजरीवाल ने राज्यसभा सीटों का सौदा किया है। इन सभी सवालों का जवाब देने के लिए गुरुवार को गोपाल राय सामने आए।

फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए उन्होंने कार्यकर्ताओं के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दिया। हालाँकि इस दौरान वह कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब देने की बजाय रटी रटाई बातें करते ज़्यादा दिखे। हालाँकि इस दौरान उन्होंने कुमार विश्वास को टिकट नही देने के फ़ैसले पर पार्टी के रूख को ज़रूर साफ़ किया। उन्होंने कुमार पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगते हुए कहा की कुमार केजरीवाल सरकार गिराने का षड्यंत्र करने में शामिल थे।

यह पहली बार था जब पार्टी का कोई नेता कुमार पर इतना बड़ा आरोप लगा रहा था। उन्होंने कहा,’ जो आम आदमी पार्टी की सरकार गिराने के लिए विधायकों को तोड़ने के षड्यंत्र में शामिल हो, जो सार्वजनिक तौर पर हर मंच का उपयोग पार्टी के खिलाफ बोलने में करता हो, उसे राज्यसभा में भेजा जा सकता है? वो पार्टी की आवाज़ बनेगा या पार्टी को खत्म करने के लिए काम करेगा? क्या ऐसे व्यक्ति को राज्यसभा भेजा जाना चहिए? मुझे लगता है कि बिल्कुल नहीं भेजा जाना चाहिए। इसलिए पार्टी ने ये निर्णय लिया।’

गोपाल यही नही रुके उन्होंने आगे कहा,’ जिस तरह से दिल्ली की सरकार गिराने का पूरा षड्यंत्र किया गया, उसके केंद्र में कुमार विश्वास जी थे। इस षड्यंत्र की अधिकतर मीटिंग कुमार विश्वास के घर पर होती थी, कपिल मिश्रा उसके नायक थे और जब बात पता चली तो कपिल मिश्रा को बर्खास्त किया गया।’ गोपाल राय ने कहा कि सब कुछ बर्दाश्त है लेकिन इस आंदोलन को खत्म करने की साज़िश बर्दाश्त नही करेंगे।

गोपाल राय के आरोपो पर फ़िलहाल कुमार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नही आयी है। लेकिन यह तय है की अब   दो धड़ों में बंटती दिखाई दे रही है। एक धड़ा अरविंद केजरीवाल का समर्थक है तो दूसरा कुमार विश्वास का। हालाँकि गोपाल के इन आरोपो के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए है। अगर कुमार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे तो फिर उन्हें राजस्थान का प्रभार क्यों सौंपा गया? अभी तक उन्हें पार्टी से बर्खास्त क्यों नही किया गया?

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